24/05/2026
“अब भगवान भरोसे शहर”
राम मंदिर पहुंच पार्षदों ने लगाई गुहार, जन जागरण प्रभात फेरी निकाली
सबलगढ़ नगर की बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ पिछले 17 दिनों से जारी जनहित सत्याग्रह रविवार को जनआंदोलन का रूप लेता नजर आया। नगर के विभिन्न वार्डों से निकली जन जागरण प्रभात फेरी राम मंदिर पहुंची, जहां पार्षदों एवं नागरिकों ने भगवान श्रीराम के चरणों में नगर की बदहाल व्यवस्था सुधारने की प्रार्थना की। इस दौरान पार्षदों की भावुक अपील में कहा “अब आपके भरोसे है शहर…”
प्रभात फेरी के दौरान नगर में जगह-जगह लोगों ने आंदोलन का समर्थन किया। महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों ने भी नगर की खराब सफाई व्यवस्था, पेयजल संकट, टूटी गलियों और अंधेरे से भरे मोहल्लों को लेकर नाराजगी जताई।
पार्षदों ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की योजनाओं के टेंडर और निर्माण कार्य पूरे होने के बाद भी प्रशासन उनकी निगरानी नहीं कर रहा। मुख्य बाजार की गलियां आज भी गंदगी से अटी पड़ी हैं, नालियां चौक हैं, कई वार्डों में पानी के लिए लोग परेशान हैं और रात होते ही अंधेरे में डूबे मोहल्ले भय का माहौल पैदा कर रहे हैं।
जनहित सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे पार्षद मोहन रामजी लाल पचौरी ने कहा —
“पिछले 17 दिनों से हम सब जनहित सत्याग्रह पर बैठे हैं। हमने प्रशासन से निवेदन किया, अधिकारियों से चर्चा की, समस्याओं को बताया लेकिन आज भी सबलगढ़ की तस्वीर नहीं बदली। हम प्रशासन से लड़ाई नहीं लड़ रहे, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई लड़ रहे हैं। हम चाहते हैं कि सबलगढ़ स्वच्छ बने, सुरक्षित बने और सुविधायुक्त बने।”
”प्रभात फेरी में उपाध्यक्ष पति मनोज प्रताप, पार्षद कैलाश चंद भगत, श्रीपति प्रजापति, डॉ. सुरेश कुशवाह, रचना असरफ, रामदीन खटीक, रामजीलाल कुशवाह, रामकुमार प्रजापति, सतेंद्र जाटव, सुशील श्रीवास एवं वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे सहित बड़ी संख्या में नागरिक शामिल रहे।
कहा कि “यह लड़ाई अव्यवस्था के खिलाफ है। लापरवाही और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ है। दर्शक बनने का समय नहीं है, बल्कि सहभागी बनने का समय है। अगर घरों में पानी नहीं आ रहा, बच्चे गंदगी में चलने को मजबूर हैं, गलियां अंधेरे में डूबी हैं और शिकायतें बिना समाधान बंद कर दी जाती हैं, तो जनता को अब अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
जनता अब जाग चुकी है और समाधान होने तक संघर्ष जारी रहेगा।” जागरण प्रभात फेरी के दौरान “जय जनहित”, “व्यवस्था बदलो”, “जनता को अधिकार दो” जैसे नारों से गूंज उठा।