Dharmendra Boddh

Dharmendra Boddh बाबा साहब का जन्म कब हुआ?

10/02/2026
20/11/2023

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रेत का घर  एक गांव में नदी के किनारे कुछ बच्चे खेलते हुए रेत के घर बना रहे थे ! किसी का पैर किसी के घर को लग जाता और वो ...
04/11/2020

रेत का घर

एक गांव में नदी के किनारे कुछ बच्चे खेलते हुए रेत के घर बना रहे थे ! किसी का पैर किसी के घर को लग जाता और वो बिखर जाता और इस बात पर झगड़ा हो जाता ! थोड़ी बहुत बचकानी उम्र वाली मारपीट भी हो जाती ! फिर वह बदले की भावना से सामने वाले के घर के ऊपर बैठ जाता और उसे मिटा देता ! और फिर से अपना घर बनाने में तल्लीन हो जाया करता ! यही बच्चो का काम था !



बुद्ध चुपचाप एक और खड़े ये सारा तमाशा अपने शिष्यों के साथ देख रहे थे ! बच्चे अपने आप में ही मशगूल थे ! इतने में एक स्त्री आकर बच्चो को कहती है साँझ हो गई है तुम सब की माये तुम्हारा रास्ता देख रही है ! बच्चो ने चौंकते हुए देखा दिन बीत गया है , साँझ हो गई है और अँधेरा होने को है !



इसके बाद वो अपने ही बनाये घरो पर उछले कूदे ! सब मटियामेट कर दिया ! और किसी ने नहीं देखा कौन किसका घर तोड़ रहा है ! सब बच्चे भागते हुए अपने घरो की और चल दिए !

बुद्ध ने अपने शिष्यों से कहा तुम मानव जीवन की कल्पना इन बच्चो की इस क्रीड़ा से कर सकते हो ! क्योंकि की तुम्हारे बनाये शहर , राजधानियां सब ऐसे ही रह जाती है ! और तुम्हे ये सब छोड़ कर जाना ही होता है !


तुम यहाँ जिंदगी की भागदौड़ में सब भूल जाते हो और खुद से कभी मिल ही नहीं पाते जबकि जाना तो सबका तय है ! इसलिए कभी भी अधिक लम्बा सोचकर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए ! वर्तमान में जीना चाहिए !
नमो बुध्दाय जय भीम 🙏

04/11/2020

धम्म निरन्नजल दिवस की बधाई 😍👇👇

आज ही के दिन सम्राट अशोक कलिंग युद्ध से विजय प्राप्त करके घर लोटे थे

वो जिस वक़्त घर पहुंचे तब तक देर रात हो चुकी थी और उनकी पत्नी ने उनके इंतज़ार में अन्न-जल ग्रहण नहीं किया था

जब अशोक आये तो उनकी पत्नी ने छलनी से उन्हें देखा, फिर जितने सैनिक विजयी होकर लोटे उनकी पत्नियों ने भी ऐसा ही किया

इस दिन को #धम्म #निरन्नजल #दिवस कहा गया और तबसे बौद्धिस्ट महिलाये अपने पति की विजय कामना के लिए इस दिन अन्न जल का त्याग करके उपवास रखती है

(आज पत्नी उपवास रखे तो तुम्हें बिलकुल भी घबराने की जरूरत नहीं.. धूमधाम से पत्नी संग सेल्फी लो और फेसबुक पर अपलोड करो )😄😄

नोट :- पोस्ट कुछ विशेष खोजी लोगो को समर्पित जो पूरा साल तो किसी त्यौहार का विरोध करते है लेकिन त्यौहार वाले दिन इतिहास में खोज करके कुछ ऐसा लिंक निकाल ही लेते है जिससे उनके घर भी त्यौहार मन सकें और कोई उनका विरोध भी ना कर सकें 😄)

इस बार मैंने तुम्हारा कार्य आसान कर दिया.. वैसे बता दू इस दिन सम्राट अशोक ने अपनी पत्नी को कंधो पर बैठाकर पुरे नगर का चक्कर लगाया था तो ये काम भी जरूर करना 😄😄

तो भाई आप सभी को इस धम्म दिवस की हार्दिक बधाई.. सेल्फी भेजना मत भूलना 😄

04/11/2020

ऑपरेशन थियेटर में जाते ही शरीर से ताबीज लॉकेट मंगलसूत्र चूड़ी उतरवाया जाता है
लोग मान भी जाते है
तब आस्था का डर नहीं रहता ?

04/11/2020

ईश्वर कही भी नहीं है अगर वह है तो मेरी पोस्ट को मिटाकर अपना अस्तित्व सिद्ध करे

🙏☸ मंगलमय सुप्रभात ☸🙏*तथागत बुद्ध की पूजा करना कर्मकांड है?*गौतम बुद्ध ने पूजा पाठ को निरर्थक माना है, तो बौद्ध लोग उनकी...
04/11/2020

🙏☸ मंगलमय सुप्रभात ☸🙏

*तथागत बुद्ध की पूजा करना कर्मकांड है?*

गौतम बुद्ध ने पूजा पाठ को निरर्थक माना है, तो बौद्ध लोग उनकी पूजा क्यों करते हैं?

*बौद्ध लोग बुद्ध की वंदना करते हैं। बुद्ध के गुणों का स्मरण करते हुए नमस्कार करते हैं।*

*🌷🙏बुद्धं नमामि🙏*

जैसे कि -

*"इतिपि सो भगवा अरहं,* *सम्मासम्बुध्दो,*
*विज्जा-चरणं सम्पन्नो,*
*सुगतो लोकविदु,*
*अनुत्तरो पुरिस-दम्मसारथी,*
*सत्था देव-मनुस्सानं बुध्दो, भगवा 'ति।।"*

*बुद्ध की वंदना को व्यवहार की भाषा में आज पूजा कहते हैं, वास्तव में यह बुद्ध के गुणों की वंदना है।*

अन्य धर्मों में मूर्ति में प्राणप्रतिष्ठा होती है और उस मूर्ति के सामने गिड़गिड़ा कर मांगे रखी जाती है। बुद्ध धम्म में यह बात कतई नहीं है।

गौतम बुद्ध के अनुयायी उनको प्रसन्न करने के लिए,उनसे कुछ मांगने के लिए, 'स्वर्ग' के लालच और 'नरक' के भय से डरकर वंदना नहीं करते हैं। उनकी वंदना बुद्ध के प्रति आभार प्रकट करने के लिए होती है, ठीक वैसे जैसे हम अपने स्कूल के शिक्षक का आभार प्रकट करते हैं। स्कुल में शिक्षक हमें पढाते हैं, हम उनको नमस्कार करके तथा चरण-स्पर्श करके अपना आभार और आदर प्रकट करते हैं।

आभार प्रकट न करना अशिष्टता मानी जाती है|

गौतम बुद्ध तो ऐसे अनोखे शिक्षक थे, जो बुद्धत्व प्राप्ति के बाद ४५ वर्षो तक धम्म चारिका करते रहे और लोगों को धम्म सिखाते रहे। वह चाहते तो बुद्धत्व प्राप्ति के बाद किसी मनपसंद स्थान में या हिमालय की कंदराओं में जाकर शेष जीवन तक निर्वाण का आनंद लेते हुए बिता सकते थे। लेकिन, उन्होंने अनंत करुणा और मैत्री के साथ लोगों को धम्म बांटा। अगर वो ऐसा नहीं करते तो आज यह कल्याणकारी धम्म हमें कैसे मिलता ?

इसलिए, धम्म मार्ग पर चलने वाला प्रत्येक व्यक्ति तथागत बुद्ध के प्रति कृतझता से भर उठता है और उसी कृतज्ञता, आभार को प्रकट करने के लिए वंदना करता है। बुद्ध का ज्ञान इतना प्रभावी है की आज भी वैज्ञानिक युग में उतना ही प्रभावी है, जितना की तथागत बुद्ध के समय में प्रभावी था।

यो सन्निसिन्नो वरबोधिमुले
मारं ससेनं महतिं विजेत्वा।
संबोधिमागच्छि अनन्तञाणो, लोकोत्तमो तं पणमामि बुद्धं।

नमामि बुद्धं गुण सागरतं।

🙏नमो बुद्धाय🙏🙏 जय भीम 🙏

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