04/11/2020
🙏☸ मंगलमय सुप्रभात ☸🙏
*तथागत बुद्ध की पूजा करना कर्मकांड है?*
गौतम बुद्ध ने पूजा पाठ को निरर्थक माना है, तो बौद्ध लोग उनकी पूजा क्यों करते हैं?
*बौद्ध लोग बुद्ध की वंदना करते हैं। बुद्ध के गुणों का स्मरण करते हुए नमस्कार करते हैं।*
*🌷🙏बुद्धं नमामि🙏*
जैसे कि -
*"इतिपि सो भगवा अरहं,* *सम्मासम्बुध्दो,*
*विज्जा-चरणं सम्पन्नो,*
*सुगतो लोकविदु,*
*अनुत्तरो पुरिस-दम्मसारथी,*
*सत्था देव-मनुस्सानं बुध्दो, भगवा 'ति।।"*
*बुद्ध की वंदना को व्यवहार की भाषा में आज पूजा कहते हैं, वास्तव में यह बुद्ध के गुणों की वंदना है।*
अन्य धर्मों में मूर्ति में प्राणप्रतिष्ठा होती है और उस मूर्ति के सामने गिड़गिड़ा कर मांगे रखी जाती है। बुद्ध धम्म में यह बात कतई नहीं है।
गौतम बुद्ध के अनुयायी उनको प्रसन्न करने के लिए,उनसे कुछ मांगने के लिए, 'स्वर्ग' के लालच और 'नरक' के भय से डरकर वंदना नहीं करते हैं। उनकी वंदना बुद्ध के प्रति आभार प्रकट करने के लिए होती है, ठीक वैसे जैसे हम अपने स्कूल के शिक्षक का आभार प्रकट करते हैं। स्कुल में शिक्षक हमें पढाते हैं, हम उनको नमस्कार करके तथा चरण-स्पर्श करके अपना आभार और आदर प्रकट करते हैं।
आभार प्रकट न करना अशिष्टता मानी जाती है|
गौतम बुद्ध तो ऐसे अनोखे शिक्षक थे, जो बुद्धत्व प्राप्ति के बाद ४५ वर्षो तक धम्म चारिका करते रहे और लोगों को धम्म सिखाते रहे। वह चाहते तो बुद्धत्व प्राप्ति के बाद किसी मनपसंद स्थान में या हिमालय की कंदराओं में जाकर शेष जीवन तक निर्वाण का आनंद लेते हुए बिता सकते थे। लेकिन, उन्होंने अनंत करुणा और मैत्री के साथ लोगों को धम्म बांटा। अगर वो ऐसा नहीं करते तो आज यह कल्याणकारी धम्म हमें कैसे मिलता ?
इसलिए, धम्म मार्ग पर चलने वाला प्रत्येक व्यक्ति तथागत बुद्ध के प्रति कृतझता से भर उठता है और उसी कृतज्ञता, आभार को प्रकट करने के लिए वंदना करता है। बुद्ध का ज्ञान इतना प्रभावी है की आज भी वैज्ञानिक युग में उतना ही प्रभावी है, जितना की तथागत बुद्ध के समय में प्रभावी था।
यो सन्निसिन्नो वरबोधिमुले
मारं ससेनं महतिं विजेत्वा।
संबोधिमागच्छि अनन्तञाणो, लोकोत्तमो तं पणमामि बुद्धं।
नमामि बुद्धं गुण सागरतं।
🙏नमो बुद्धाय🙏🙏 जय भीम 🙏