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Tazes News नजर हर छोटी बड़ी खबर पर

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13/03/2026

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वर्ल्ड कप जितने के बाद माता वैष्णो देवी जी के दरवार दर्शन करने पहुंचे भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा
13/03/2026

वर्ल्ड कप जितने के बाद माता वैष्णो देवी जी के दरवार दर्शन करने पहुंचे भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा

India are through to the   semi-finals ✨
01/03/2026

India are through to the semi-finals ✨

कारगिल युद्ध में द्रास सेक्टर में भारतीय अधिकारीयों के बीच एक बड़ी ही फेमस लाइन प्रचलित थीं "If you want to know, ask Joe...
04/02/2026

कारगिल युद्ध में द्रास सेक्टर में भारतीय अधिकारीयों के बीच एक बड़ी ही फेमस लाइन प्रचलित थीं "If you want to know, ask Joe"

Joe सर यानी तब के लेफ्टिनेंट कर्नल योगेश कुमार जोशी...
13th J&K राइफल्स के CO... जिन्ह ये प्रमोशन भी युद्ध के मैदान में ही मिला.... निडर.... बेवाक अफसर.... और उसकी कार्यशैली ऐसी की दुश्मन के साथ उच्च अधिकारी भी चौंक जाते.....

आप Joe साहब के कहर का अंदाज़ा इससे लगाइये के साहब चार बड़े मिशन उन्हें दिये गए.... वे सिर्फ जीत कर न लौटे... दुश्मन में खौफ़ भर कर जीत दर्ज़ की...
नियम कायदे... प्लानिंग ये वार रूम में छोड़ आगे जाते थे...
LoC क्रॉस कर दुश्मन को खदेड कर भी मारा.... सर भी कलम किये...
वार ट्रॉफी के तौर पर बहुत कुछ लाए....

13 J&K राइफल्स ने 25 वीरता पदक कारगिल युद्ध में जीते... जिनमें 2 परम वीर चक्र और 8 वीर चक्र शामिल थे...

Lt. जनरल जोशी को चीन के मामले में सबसे योग्य अधिकारी माना जाता है... चीनी भाषा और हरकतें दौनो के एक्सपर्ट...
वर्तमान में कई ऐसे भारतीय पोस्ट LAC पर हैं जो कब्ज़ा करने के बाद सरकार तक ख़बर पहुँची.....

तो भाई Lt. जनरल जोशी साहब जैसा जिद्दी joe कहलाने वाला अफसर चीनियों को रोकने के लिए आलती पालती मार ऊपर से ऑर्डर का इंतज़ार कर रहा होगा..... मुझे तो इसकी संभावना न्यूनतम ही दिखती है...

सारी चीज़ेँ न कभी किताबों में आएंगी न न्यूज में..... पर योद्धा अपना मूल स्वाभाव नहीं छोड़ता.... Joe साहब का मूल स्वाभाव ही दुश्मन को चौकाना रहा....और युद्ध में सिर्फ एक नियम मानने का.... जीत...

थाईलैंड में सामने आया यह दृश्य केवल एक खबर नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया के दिलों को जोड़ देने वाला ऐसा पल बन गया, जिसने य...
31/01/2026

थाईलैंड में सामने आया यह दृश्य केवल एक खबर नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया के दिलों को जोड़ देने वाला ऐसा पल बन गया, जिसने यह याद दिला दिया कि इंसानियत आज भी ज़िंदा है।
हॉस्पिटल पहुँचने से पहले ही, तेज़ ट्रैफिक के बीच एक चलती गाड़ी में जीवन ने जन्म ले लिया, और कुछ ही सेकंड में वह सड़क एक साधारण रास्ता नहीं, बल्कि उम्मीद और संवेदना का मंच बन गई।
जैसे ही गाड़ी में डिलीवरी होने की खबर फैली, ट्रैफिक थम सा गया, हॉर्न की आवाज़ें ख़ामोश हो गईं और हर दिशा से लोग मदद के लिए दौड़ पड़े, मानो सभी एक ही परिवार का हिस्सा हों।
माँ पहले घबराई हुई थीं, दर्द, डर और अनिश्चितता उनके चेहरे पर साफ़ झलक रही थी, लेकिन उसी पल जब उन्होंने अपने बच्चे की पहली आवाज़ सुनी, तो वही चेहरा खुशी के आँसुओं से भर उठा।
वह पल ऐसा था जहाँ डर ने हार मान ली और ममता ने जीत हासिल कर ली, जहाँ आँसू तकलीफ के नहीं बल्कि जीवन की जीत के थे।
सड़क पर खड़े अजनबी लोग अचानक अपने नहीं रहे, वे सब उस नवजीवन के स्वागत में शामिल हो गए, किसी ने पानी दिया, किसी ने कपड़ा, तो किसी ने बस दुआएँ
ट्रैफिक जाम उस दिन बाधा नहीं बना, बल्कि वह एक ऐसी व्यवस्था बन गया जिसने एक माँ और बच्चे को सुरक्षा की चादर में लपेट लिया।
जब बच्चे की रोने की आवाज़ गूँजी, तो वह केवल एक शिशु की पुकार नहीं थी, वह इंसानियत की जीत की घोषणा थी।
उस माँ की घबराहट पल भर में गर्व और खुशी में बदल गई, और उसकी मुस्कान ने वहाँ मौजूद हर आँख को नम कर दिया।
आगे जो हुआ, वह दृश्य कैमरे में कैद ज़रूर हुआ,
लेकिन उसका असर सीधे दिलों में उतरा — क्योंकि कुछ पल ऐसे होते हैं जिन्हें शब्द नहीं, सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है।
यह घटना हमें सिखाती है कि जीवन कभी भी, कहीं भी, किसी भी हालात में जन्म ले सकता है, और इंसानियत अगर साथ हो तो हर रास्ता अस्पताल बन सकता है।
दुनिया चाहे कितनी भी तेज़ क्यों न भाग रही हो,कुछ पल ऐसे होते हैं
जहाँ समय खुद रुककर जीवन को सलाम करता है। ❤️



#2026

सुशांत पंगोत्रा माता व पिता :  नीरजशर्मा सुरेश शर्मा चक्क सद्दा साम्बा बहुत-बहुत मुबारकबाद वजन्मदिन कि शुभकामनायेंमाँ भग...
29/01/2026

सुशांत पंगोत्रा
माता व पिता : नीरजशर्मा सुरेश शर्मा
चक्क सद्दा
साम्बा बहुत-बहुत मुबारकबाद व
जन्मदिन कि शुभकामनायें
माँ भगवती आप पर सदैव अपनी कृपादृष्टि बनाए रखे

जो रास्ता आज कठिन लग रहा है, वही कल तुम्हारी पहचान बनेगा राष्ट्रपति भवन में तीन अशोक चक्र दो परमवीर चक्र एक साथ एक टेबल ...
27/01/2026

जो रास्ता आज कठिन लग रहा है, वही कल तुम्हारी पहचान बनेगा
राष्ट्रपति भवन में तीन अशोक चक्र दो परमवीर चक्र एक साथ एक टेबल पर जिसमें आपके दिख रहे होंगे अंतरिक्ष रहने वाले और भारतीय वायुसेना के जांबाज अधिकारी जिनको कल ही राष्ट्रपति जी द्वारा अशोक चक्र से सम्मानित किया गया l यही सच में भारत के सच्चे सपूत रियल हीरो हैं l जय हिंद

कोर्ट ने दी मंजूरी ये हैं गाजियाबाद के हरीश राणा, जो 12 साल पहले चंडीगढ़ में बी.टेक की पढ़ाई करने गए थे वहां चौथी मंजिल ...
18/01/2026

कोर्ट ने दी मंजूरी
ये हैं गाजियाबाद के हरीश राणा, जो 12 साल पहले चंडीगढ़ में बी.टेक की पढ़ाई करने गए थे वहां चौथी मंजिल से गिर गये तब उन्हें सर पर चोट लगी और वो कोमा में चले गए.. चंडीगढ़, दिल्ली हर जगह इलाज हुआ लेकिन वो कोमा से बाहर नहीं आए..12 साल से मां बाप उनका इलाज कर रहे अब इच्छा मृत्यु की मांग सरकार से की, सरकार ने सारे पहलू देखते हुए उनकी मांग मान ली।
अब कुछ लोग का कहना है नहीं उनको जिन्दा रखना चाहिए जब तक भगवान सांस दिए हैं। अपने घर में अगर 12 दिन कोई बिस्तर पकड़ ले ना तो लोग इलाज करने में घबरा जाते ये बुढ़े मां बाप कब तक साथ दें। वो भी मरने वाले कगार पर हैं कौन करेगा सेवा, फैमिली में आजकल पति-पत्नी एक दूसरे का करते नहीं, भाई परिवार कौन करता। हो सकता मेरी बात बुरी लगे अस्पताल का खर्च, 24 घंटे एक आदमी किसी से संभव नहीं..
भगवान ऐसी हालत किसी को ना दें लेकिन ऐसे में उनका फैसला सही है, पुरे शरीर पर सूई चुभाए रखना, पाइप का जाल पुरे शरीर लिपटा है वो खुद भी नहीं चाहते होंगे कि जिंदा रहे...
बाकी आप अपनी राय दें सकते....

बाकी मेरा तो यही मानना है कि कोई भी मां-बाप ये भी नहीं चाहता कि उसके औलाद को थोड़ी सी कोई आंच भी आए यह तो मामला ही इच्छा मृत्यु का है।

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से निकला एक सीधा सादा साधारण युवक, जिसने अपने असाधारण साहस से भारतीय सैन्य इतिहास में अमर...
15/01/2026

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से निकला एक सीधा सादा साधारण युवक, जिसने अपने असाधारण साहस से भारतीय सैन्य इतिहास में अमर स्थान बना लिया। इस वीर सपूत का नाम है संजय कुमार। एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे संजय कुमार के चाचा सेना में थे और बचपन से ही उनके मन में भी वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना था।

सेना परीक्षण में तीन बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः 26 जून 1996 को 13 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स में भर्ती हुए।

कारगिल युद्ध के दौरान 4 जुलाई 1999 की वह रात भारतीय सेना के लिए निर्णायक साबित हुई। ऑपरेशन विजय के अंतर्गत उनकी टुकड़ी को मुश्कोह घाटी में स्थित पॉइंट 4875 पर कब्जा करना था, जिसे फ्लैट टॉप भी कहा जाता है। यह एक बेहद दुर्गम और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चोटी थी, जहां पाकिस्तानी सेना ने मजबूत बंकर और मशीन गन पोजीशन बना रखी थी। सामने से लगातार भारी गोलीबारी हो रही थी और भारतीय टुकड़ी आगे बढ़ने में असमर्थ हो गई थी।

ऐसे समय में बिना किसी आदेश के राइफलमैन संजय कुमार स्वेच्छा से आगे बढ़े। वे पेट के बल रेंगते हुए पहाड़ी के किनारे किनारे पहले दुश्मन बंकर की ओर बढ़े। दुश्मन की मशीन गन की बौछार में उन्हें सीने और बाएं हाथ में दो गोलियां लगीं, लेकिन उन्होंने रुकने से इनकार कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वे पहले बंकर तक पहुंचे और हाथों हाथ की लड़ाई में तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया।

इसके बाद उन्होंने दुश्मन की ही मशीन गन उठाई और दूसरे बंकर की ओर बढ़ चले। अपने ही हथियार से एक भारतीय सैनिक को हमला करते देख पाकिस्तानी सैनिकों का मनोबल टूट गया। वे भागने लगे, लेकिन संजय कुमार ने दौड़ते हुए कई दुश्मनों को ढेर कर दिया। अकेले ही उन्होंने पूरे मोर्चे को साफ कर दिया और न केवल फ्लैट टॉप की लड़ाई जीती, बल्कि पूरे सेक्टर में भारतीय सेना की स्थिति बदल दी।

इस अद्वितीय वीरता और बलिदान के लिए संजय कुमार को भारत के सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

सेना में उनका सफर यहीं नहीं रुका। वर्ष 2014 में वे नायब सुबेदार बने और भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में प्रशिक्षण देने लगे। फरवरी 2022 में पदोन्नत होकर वे सुबेदार मेजर बने और वर्तमान में नेशनल डिफेंस अकैडमी खड़कवासला पुणे में युवा कैडेट्स को प्रशिक्षण दे रहे हैं।

संजय कुमार भारत के उन गिने चुने जीवित परमवीर चक्र विजेताओं में से एक हैं। उनके जीवन पर आधारित फिल्म LOC कारगिल में उनका किरदार अभिनेता सुनील शेट्टी ने निभाया था।

वे आज भी राष्ट्र सेवा में समर्पित हैं और हर भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक हैं।
जय हिंद 🇮🇳

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स के दर्द को समझने के लिए एक अनोखा कदम उठाया। एक दिन के लिए वे ...
13/01/2026

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स के दर्द को समझने के लिए एक अनोखा कदम उठाया। एक दिन के लिए वे ब्लिंकिट डिलीवरी एजेंट बन गए और दिल्ली के घर-घर ऑर्डर पहुंचाए।


अनोखी पहल
12 जनवरी 2026 को राघव ने ब्लिंकिट की यूनिफॉर्म पहनकर बाइक पर सवार हो गए। वायरल वीडियो में वे ग्राहकों को सामान सौंपते नजर आए। यह कदम संसद में गिग वर्कर्स के मुद्दे उठाने के बाद आया। उन्होंने 15 घंटे में 763 रुपये कमाने वाले डिलीवरी बॉय हिमांशु से पहले मुलाकात की थी।

गिग वर्कर्स का दर्द
राघव ने कहा कि लंबे घंटे, कम कमाई और असुरक्षा गिग इकॉनमी का काला सच है। 10 मिनट डिलीवरी का दबाव जानलेवा है। उन्होंने ब्लिंकिट, जोमैटो, स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म्स पर श्रमिक सुरक्षा की मांग की।

सोशल मीडिया पर वायरल
वीडियो तेजी से वायरल हुआ। फैंस ने सराहा, कुछ ने राजनीतिक स्टंट कहा। राघव ने जवाब दिया, "सच अनुभव से ही समझ आता है।" यह पहल गिग वर्कर्स को नीतिगत बदलाव दिला सकती है।
प्रभाव
राघव की यह कोशिश सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैला रही। गिग इकॉनमी में लाखों युवाओं की जिंदगी सुधारने का संदेश।

जिस चोटी पर ईगल भी नहीं उड़ सकता, वहां बाना सिंह तिरंगा फहरा आए!" भारतीय सेना के नायब सूबेदार बाना सिंह ने 21,000 फीट की...
13/01/2026

जिस चोटी पर ईगल भी नहीं उड़ सकता, वहां बाना सिंह तिरंगा फहरा आए!"

भारतीय सेना के नायब सूबेदार बाना सिंह ने 21,000 फीट की ऊंचाई पर 90 डिग्री की सीधी बर्फ की दीवार चढ़कर दुश्मन को खत्म किया जो एक चमत्कार से कम नहीं है। उनके सम्मान में भारत सरकार ने उस पोस्ट का नाम 'बाना टॉप' रख दिया।













चेन्नई की सड़कों पर झाड़ू लगाने वाली एस. पद्मा के लिए वो एक आम दिन था। काम करते वक़्त उनकी नज़र एक लावारिस बैग पर पड़ी। जब उन...
13/01/2026

चेन्नई की सड़कों पर झाड़ू लगाने वाली एस. पद्मा के लिए वो एक आम दिन था। काम करते वक़्त उनकी नज़र एक लावारिस बैग पर पड़ी। जब उन्होंने बैग देखा, तो अंदर ₹45 लाख के सोने के गहने थे।

वो बैग लेकर सीधे पोंडी बाज़ार पुलिस स्टेशन गईं और पुलिस को सौंप दिया। पता चला कि वो बैग एक ज्वेलर का था जो बातों-बातों में उसे ठेले पर भूल गया था।

पद्मा को न तो कोई इनाम चाहिए था, न ही अखबार में फोटो। उन्होंने बस वही किया जो उनका जमीर ने कहा। एस. पद्मा ने सिखा दिया कि गरीबी कपड़ों में हो सकती है, लेकिन सोच और चरित्र में नहीं। ऐसे ही लोग दुनिया में अच्छाई की उम्मीद बनाए हुए हैं।










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