25/01/2026
यह सत्ता के विरोध का समय है।
क्योंकि चुप्पी अब अपराध बन चुकी है।
आज जो लोग असहमति को देशद्रोह कह रहे हैं,
वे भूल गए हैं कि
इतिहास में हर तानाशाही
तालियों के शोर में ही पैदा हुई है।
U – उल्टी सत्ता
जो सरकारें सवालों से डरने लगें,
समझ लीजिए वे जवाब देना भूल चुकी हैं।
विश्वविद्यालयों को नियंत्रित करना,
शिक्षा को लाइन में खड़ा करना,
और विचारों को “अनुमति” से बाँधना—
यह शासन नहीं, भय का प्रबंधन है।
G – गिनती का गणित
आज सत्ता को नागरिक नहीं चाहिए,
उन्हें सिर्फ़ भीड़ चाहिए।
जो गिने जा सकें,
जो पूछ न सकें,
जो आदेश को ही ज्ञान समझ लें।
लेकिन इतिहास गिनती से नहीं,
विवेक से लिखा जाता है।
C – चुप्पी से शुरू होने वाला अपराध
जब समाज चुप रहता है,
तभी तानाशाही बोलना सीखती है।
और जब बुद्धिजीवी डर जाएँ,
तभी सत्ता निरंकुश बनती है।
आज यदि असहमति नहीं जताई,
तो आने वाली पीढ़ियाँ
हमसे सवाल नहीं—
हिसाब माँगेंगी।
और तब
कोई डिग्री,
कोई पद,
कोई पहचान
हमें नहीं बचा पाएगी।
सवर्णों का पक्ष स्पष्ट है—
हमारी परंपरा चुप रहने की नहीं,
तर्क करने की है।
हमारी पहचान आदेश मानने की नहीं,
अन्याय के सामने खड़े होने की है।
हमने हमेशा सत्ता को शक्ति दी है,
लेकिन कभी भी
उसे ईश्वर नहीं माना।
यह पोस्ट किसी दल के खिलाफ नहीं,
यह हर उस सत्ता के खिलाफ है
जो सवाल से डरती है।
📚 शिक्षा नियंत्रण से नहीं, संघर्ष से बचती है।
🖋️ लोकतंत्र प्रशंसा से नहीं, प्रतिरोध से ज़िंदा रहता है।
आज नहीं बोले,
तो कल इतिहास बोलेगा—
और तब हमारे पास
सिर्फ़ शर्म बचेगी।
अब भी समय है।
असहमति दर्ज कराइए।
वरना आने वाली पीढ़ियाँ हमें कायर कहेंगी।
अजीत मिश्रा
स्वतंत्र पत्रकार
परशुरामपूरी शाहजहांपुर