29/01/2026
Master Bagh सिर्फ़ एक इलाक़ा नहीं था,
वह एक ज़िम्मेदारी थी…
और उस ज़िम्मेदारी का नाम था Mustafa Husain।
जब लोग सत्ता की बात करते हैं,
तो कुर्सी याद आती है।
लेकिन Master Bagh के लोग जब प्रधान की बात करते थे,
तो एक ही चेहरा सामने आता था —
सादा, सच्चा और मज़बूत।
Mustafa Husain,
Master Bagh में रहने वाला,
मगर दिलों पर राज करने वाला इंसान था।
वह प्रधान बना तो जुलूस नहीं निकाला,
न ही बैनर लगवाए।
उसने बस इतना कहा—
“अगर आपने मुझे चुना है,
तो मैं आपको कभी अकेला नहीं छोड़ूँगा।”
और उसने अपना वादा निभाया।
किसी की नाली बंद होती,
तो Mustafa खुद मौके पर पहुँचता।
किसी का हक़ दबता,
तो वह सबसे पहले आवाज़ बनता।
वह फ़ाइलों में नहीं,
गलियों में मिलता था।
वह आदेश नहीं देता था,
साथ खड़ा होता था।
Master Bagh में जब कोई परेशानी आती,
तो लोग कहते—
“चिंता मत करो, Mustafa है।”
उसका दरवाज़ा कभी बंद नहीं होता था।
अमीर हो या ग़रीब,
हर किसी की बात वही वक़्त देती थी।
एक बार Master Bagh में बड़ा झगड़ा हो गया।
लोग दो हिस्सों में बँट गए।
गुस्सा, नारे और पत्थर—
सब तैयार थे।
Mustafa Husain बीच में खड़ा हुआ।
न पुलिस बुलाई,
न लाठी उठाई।
उसने बस इतना कहा—
“अगर एक माँ का बेटा मरेगा,
तो उसका दर्द पूरे Master Bagh को जलेगा।”
भीड़ चुप हो गई।
पत्थर नीचे गिर गए।
उस दिन Master Bagh बच गया।
वक़्त गुज़रा,
Mustafa बूढ़ा हो गया,
मगर उसकी नीयत जवान रही।
जब वह इस दुनिया से गया,
तो Master Bagh ने एक प्रधान नहीं खोया—
एक साया खोया।
आज भी वहाँ कोई बच्चा पढ़ जाता है,
कोई गली साफ़ रहती है,
कोई झगड़ा रुक जाता है,
तो लोग दिल से कहते हैं—
“Mustafa Husain होते,
तो ऐसा ही करते।”
और यही पहचान होती है
एक शानदार प्रधान की—
जो कुर्सी से नहीं,
किरदार से याद रखा जाए।
और भी बहुत सी शख्सियत हुए है
मास्टर बाग मे जिनसे हम आपको रुबरू कराते रहेंगे
✍️Mukhtar Ali .. Mb