23/08/2025
#स्वतंत्रता_के_बाद_भारत_सरकार ने कई #रियासतों और क्षेत्रों को एकीकृत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। #सरदार_पटेल द्वारा विभिन्न #रियासतों के विलय के प्रयास के दौरान 1948 में #बघेलखंड और #बुंदेलखंड की 35 रियासतों को मिलाकर विंध्य प्रदेश का गठन किया गया था! यह क्षेत्र पश्चिम में दतिया से पूर्व में सोनभद्र, उत्तर में प्रयागराज और दक्षिण में बिलासपुर तक फैला हुआ था। रीवा इसकी राजधानी थी, आज जो अब रीवा नगर निगम है, पहले विधानसभा के रूप में कार्य करती थी।
1948 में #विंध्य_प्रदेश को राज्य बना दिया गया जिसे केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में रखा गया था ! जब भारत के अधिकतर रियासतों का विलय हो चुका था! तब 31 अगस्त 1956 को #भारत_सरकार द्वारा राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 को पारित किया गया । और भारत सरकार ने भाषाई और प्रशासनिक आधार पर #राज्यों का पुनर्गठन करने के लिए 1 नवम्बर 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू किया। इसके तहत #विंध्य_प्रदेश, मध्य भारत, भोपाल, छत्तीसगढ़ और अन्य क्षेत्रों को मिलाकर एक नया #मध्य_प्रदेश बनाया गया, जिसकी राजधानी भोपाल को बनाया गया। विलय के समय, तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और केंद्र सरकार ने #विंध्य_प्रदेश को ाजधानी जैसी सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराने का वादा किया था। लेकिन उप राजधानी की सुविधा कभी नहीं मिली । #विंध्य_प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शंभूनाथ शुक्ला और #केंद्र_सरकार के बीच कुछ शर्तों पर समझौते हुए थे, लेकिन उस समझौते को भारत सरकार ने कभी सार्वजनिक नहीं किया। विलय के बाद #विंध्य_क्षेत्र के लोगों को लगने लगा कि उनके क्षेत्र को भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर जैसे शहरों की तुलना में उपेक्षित रखा गया। संसाधनों का असमान्य वितरण और प्रशासनिक उपेक्षा ने असंतोष को बढ़ावा दिया। जिसके कारण #विंध्य_प्रदेश में विरोध #आंदोलन शुरू हो गया! विलय के समय (1956) में ही #विंध्य_प्रदेश के स्थानीय नेताओं और जनता ने इसका व्यापक विरोध किया। इस विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, और कुछ स्थानों पर #गोलीबारी की घटनाएं भी हुईं। जिनमें गंगा, चिताली, अजीज आदि क्रांतिकारी शाहिद हुए और सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हुए ! विलय के बाद, विंध्य क्षेत्र को केवल सुदूर जिलों की तरह देखा जाता है, और यह क्षेत्र राजस्व देने के बावजूद विकास में पीछे छूट गया । सिंगरौली और शहडोल, अमरिया जैसे क्षेत्र, जो खनिज संसाधनों से समृद्ध थे, फिर भी आज तक उपेक्षित रहे। #विंध्य_प्रदेश के पुनर्गठन की मांग समय-समय पर उठती रही। स्थानीय नेताओं ने तर्क दिया कि छोटे राज्यों का गठन विकास के लिए बेहतर होता है, जैसा कि झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के उदाहरण से स्पष्ट है। 10 मार्च 2000 को मध्य प्रदेश की विधानसभा में अमरपाटन के तत्कालीन विधायक #शिव_मोहन_सिंह ने विंध्य प्रदेश के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस प्रस्ताव में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के #विंध्य और #बुंदेलखंड क्षेत्रों को मिलाकर एक अलग राज्य बनाने की मांग की गई थी। हालांकि, इस पर #केंद्र_सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। 2021 में, मैहर से बीजेपी विधायक #नारायण_त्रिपाठी ने विंध्य प्रदेश की मांग को फिर से उठाया। उन्होंने सीधी जिले के चुरहट में एक बड़ी सभा आयोजित की और 400 गाड़ियों के काफिले के साथ आंदोलन की शुरुआत की। लेकिन इसके बावजूद #आंदोलन को तेजी नहीं मिल पाई ! जिसका कारण था विंध्य प्रदेश को लेकर जनता में जागरूकता की कमी! लोग जानते ही नहीं हैं कि विंध्य प्रदेश क्या था, क्या है , क्यों विंध्य प्रदेश की मांग उठ रही है। और जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे तब तक एक बृहद आंदोलन खड़ा होना मुश्किल है और जब तक एक #वृहद_आंदोलन खड़ा नहीं होगा, जब तक आंदोलनकारी #दिल्ली कूच नहीं करेंगे तब तक #विंध्य_प्रदेश उपेक्षित ही रहेगा ! 1956 में राज्यों के गठन का मुख्य कारण भाषाई और सांस्कृतिक आधार पर राज्यों का पुनर्गठन करना था, ताकि लोगों को प्रशासन में सुविधा हो, स्थानीय भाषाओं का विकास हो और राष्ट्र की एकता व अखंडता को बनाए रखा जा सके। 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत भारत को भाषाई आधार पर 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया था ! इन राज्यों में अलग - अलग भाषाई प्रांतों को मिलाकर एक बड़े राज्य का निर्माण किया गया था ! जिसके कारण स्थानीय भाषाएं, सांस्कृतिक आधार पर जनता में अपने सरकार के प्रति असंतोष बढ़ने लगा ! और जनता अपने क्षेत्र ,भाषा और संस्कृत के आधार पर अपने राज्य मांगना शुरू कर दी! तब राज्यों को छोटा किया गया अलग - अलग प्रांतीय भाषा , संस्कृति के आधार पर राज्यों का गठन होना शुरू हुआ और आज भारत में 29 राज्य बनाए जा चुके हैं। आज भारत में जितने छोटे राज्य हैं वह उतना ही खुशहाल राज्य बना हुआ है और जितने ही बड़े राज्य हैं वह उतना ही ज्यादा भय , भूख,भ्रष्टाचार, अपराध , बेगारी, की चपेट में हैं। इसलिए अगर अपनी विरासत को सुरक्षित करना है , अपने संस्कृति, अपनी भाषा को सुरक्षित रखना है तो विंध्य प्रदेश मांगना पड़ेगा, विंध्य प्रदेश के लिए लड़ना पड़ेगा । और यह तभी संभव हो पाएगा जब ज्यादा से ज्यादा लोग विंध्य प्रदेश बनाने की बात करें । आंदोलन खड़ा करें । और प्रत्यक्ष रूप से सभी एक साथ खड़े हो। कुछ नहीं कर सकते तो हैं तो दो चार लोग जो विंध्य प्रदेश की बात कर रहे हैं उनका मनोबल जरूर बढ़ाए। विंध्य प्रदेश क्या था क्या है लोगों को, युवाओं को, बच्चों को इसके इतिहास के बारे में आप जितना जानते हो जरूर बताए।
िंध्य ारत 🙏🙏