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24/05/2026

• विद्युत कंपनी की उपभोक्ताओं को सलाह: 26 डिग्री पर चलाएं AC, बचाएं 30 प्रतिशत तक बिजली

• स्मार्ट उपभोक्ता की स्मार्ट चॉइस

गर्मी में बिजली की खपत बढ़ने से बिजली बिल अधिक आता है, लेकिन कुछ तरीके अपना कर बिजली बिल में कमी की जा सकती है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि एक शोध से यह साबित हुआ है कि एसी का तापमान 26 डिग्री पर सेट करने से बिजली बिल में 30 प्रतिशत तक कमी हो सकती है। शोध के अनुसार, प्रत्येक डिग्री तापमान में वृद्धि के परिणामस्वरूप स्प्लिट एसी की ऊर्जा खपत में 6 प्रतिशत की कमी आती है।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अनुसार गर्मियों के दौरान एयर कंडीशनर के लगातार चलने के कारण बिजली का बिल उपभोक्ताओं के लिए चिंता का एक बड़ा कारण बन जाता है। लेकिन एयर कंडीशनर का समझदारी से उपयोग करके आप इसे काफी हद तक कम कर सकते हैं। विद्युत वितरण कंपनी के द्वारा जारी सुझावों में सबसे महत्वपूर्ण है कि एसी को ऊंचे लेकिन आरामदायक तापमान पर चलाना चाहिए।

कमरे को तुरंत ठंडा करने के लिए तापमान को 18 डिग्री तक कम करना एक आम गलतफहमी है। जबकि 26 डिग्री सेल्सियस तक कमरे का तापमान कम करने में भी उतना ही समय लगता है। लेकिन जब आप कम तापमान सेट करते हैं, तो कंप्रेसर को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इसके परिणामस्वरूप अधिक बिल आता है। यहां तक कि अगर आप थर्मोस्टेट को 18 डिग्री पर सेट करने के बाद कुछ मिनटों के भीतर एसी बंद कर देते हैं, तो विभिन्न लीक के माध्यम से ठंडी हवा के फैलने से तापमान तेजी से बढ़ जाएगा, जिससे आपका प्रयास व्यर्थ हो जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप थर्मोस्टेट को 26 डिग्री सेल्सियस पर सेट करके टाइमर को 2 घंटे के लिए सेट करते हैं और साथ में सीलिंग फैन चला देते हैं, तो यह आमतौर पर अच्छी नींद के लिए आरामदायक तापमान बनाए रखता है। इसलिए समझदारी से काम लेते हुए एसी को 26 डिग्री पर सेट करें तथा सीलिंग फैन एक या दो पाइंट पर जरूर चलाएं, ऐसा करने से बिजली बिल में कमी आ सकती है।

ये मैडम... अपनी सिंगरौली की नौकरी कभी नहीं भूलेंगी... सिंगरौली की जनता ने इन्हें खुला आसमान सौंप दिया है और प्रशासन ने प...
24/05/2026

ये मैडम... अपनी सिंगरौली की नौकरी कभी नहीं भूलेंगी... सिंगरौली की जनता ने इन्हें खुला आसमान सौंप दिया है और प्रशासन ने पंख लगा दिए हैं।

24/05/2026

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24/05/2026

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कोयलांचल क्षेत्र में प्रदूषण पर NGT सख्त: सिंगरौली और माइनिंग क्षेत्रों में धूल नियंत्रण के कड़े निर्देशदेश की ऊर्जा राज...
24/05/2026

कोयलांचल क्षेत्र में प्रदूषण पर NGT सख्त: सिंगरौली और माइनिंग क्षेत्रों में धूल नियंत्रण के कड़े निर्देश

देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में विख्यात सिंगरौली और उसके आस-पास के कोयलांचल क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। माइनिंग और भारी वाहनों के परिवहन के कारण हवा में घुलती कोयले की काली धूल और बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर संज्ञान लेते हुए न्यायाधिकरण ने स्थानीय प्रशासन और कोयला उत्पादक कंपनियों को सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।

एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक और औद्योगिक विकास के नाम पर स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। ट्रिब्यूनल ने कोल माइनिंग क्षेत्रों और परिवहन मार्गों पर तत्काल प्रभाव से 'डस्ट सप्रेशन सिस्टम' (धूल नियंत्रण प्रणाली) को मजबूत करने और सड़कों के नियमित रखरखाव के आदेश दिए हैं।

हवा में घुलता जहर और उड़ती धूल बड़ी चुनौती

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की विभिन्न रिपोर्टों में सिंगरौली को 'क्रिटिकली पोल्यूटेड एरिया' (अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्र) की श्रेणी में रखा जाता रहा है। एक आंकड़े के अनुसार, इस क्षेत्र में साल के 365 दिनों में से लगभग 95 दिन हवा की गुणवत्ता बेहद खराब या गंभीर श्रेणी में दर्ज की जाती है। भारी ट्रकों द्वारा खुले में कोयले और फ्लाई ऐश (कोयला राख) के परिवहन से सड़कों पर गड्ढे बन जाते हैं और वाहनों के गुजरने से उड़ने वाले बारीक कण (PM 10 और PM 2.5) हवा में मिलकर सांस की बीमारियों का कारण बन रहे हैं।

NGT के प्रमुख निर्देश और जवाबदेही तय

बढ़ते स्वास्थ्य संकट को देखते हुए एनजीटी ने निम्नलिखित कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:

1. डस्ट सप्रेशन System: माइनिंग ब्लॉक और लोडिंग पॉइंट पर लगातार पानी का छिड़काव करने के लिए फिक्स्ड और मोबाइल स्प्रिंकलर लगाए जाएं।

2. सड़कों का सुचारू रखरखाव: कोयला परिवहन के लिए उपयोग होने वाले मार्गों की मरम्मत समय पर की जाए ताकि हिचकोलों के कारण कोयला और राख सड़कों पर न गिरे।

3. बंद ट्रकों में परिवहन: परिवहन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए सभी कोल और फ्लाई ऐश वाहनों को पूरी तरह तिरपाल या मैकेनाइज्ड क्लोज्ड सिस्टम से ढकना अनिवार्य होगा।

स्थानीय प्रशासन और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इन निर्देशों के क्रियान्वयन की निगरानी करने और आदेश का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी पर्यावरणीय जुर्माना लगाने की स्वतंत्रता दी गई है। इस कड़े रुख से उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सिंगरौली के नागरिकों को प्रदूषण से बड़ी राहत मिलेगी।

सिंगरौली के विकास का प्लान आजाद भारत के प्रथम और भूतपूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से बन रहा है। उन्हों...
24/05/2026

सिंगरौली के विकास का प्लान आजाद भारत के प्रथम और भूतपूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से बन रहा है। उन्होंने ने भी सरदार बल्लभ पंत सागर बांध के उद्घाटन के समय सिंगरौली को विश्व स्तर के शहरों के तर्ज पर विकसित करने का वादा किया था।

मध्य प्रदेश में तीन पंचवर्षीय मुख्यमंत्री रहे श्री Shivraj Singh Chouhan ने भी दर्जनों बार सिंगरौली को सिंगापुर जैसा शहर बनाने का वादा किया था।

आप भी अभी तक विकास का मास्टर प्लान बना ही रहे हैं लेकिन सिंगरौली विकसित कब होगी इसका किसी को कोई पता नहीं है।

वो कहावत याद है ना?
24/05/2026

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24/05/2026

सिंगरौली में बनाए जाने वाले स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का विजुअल जारी हुई....अब देखते हैं कि ये सपना कितने दिनों/वर्षों में साकार होता है।

24/05/2026

सभी जिलेवासियों को 18वें सिंगरौली दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं, सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना

24/05/2026

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