06/08/2026
असम एवं ओडिशा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए इमारत-ए-शरीया की राहत टीमें रवाना हो रही हैं : नाज़िम इमारत-ए-शरीया
असम एवं ओडिशा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए इमारत-ए-शरीया की राहत टीमें रवाना हो रही हैं : नाज़िम इमारत-ए-शरीया
(प्रेस विज्ञप्ति)
वर्तमान समय में उत्तर-पूर्वी भारत के राज्य असम तथा ओडिशा के अनेक जिले भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। विशेष रूप से असम के शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट और चराइदेव (सरायदेव) जिलों में भारी तबाही हुई है। चारों ओर भय, दहशत और असुरक्षा का माहौल है। लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊँचे स्थानों तथा तटबंधों पर शरण लेने को मजबूर हैं। हर ओर अफरा-तफरी और बेबसी का वातावरण बना हुआ है।
आप जानते हैं कि जब भी देश और समाज पर इस प्रकार की कोई आपदा आई है, तब इमारत-ए-शरीया बिहार, ओडिशा, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल की राहत टीमें बिना किसी धर्म और जाति का भेदभाव किए समय पर पीड़ित लोगों तक पहुँची हैं तथा उनके बीच राहत सामग्री का वितरण किया है।
इसी क्रम में अमीर-ए-शरीअत बिहार, ओडिशा, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल हज़रत मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी के निर्देश पर फिलहाल 10-10 सदस्यों वाली दो राहत टीमों का गठन किया गया है, ताकि वे तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचकर राहत एवं सहायता कार्य शुरू कर सकें।
इसी संबंध में अमीर-ए-शरीअत के निर्देशानुसार 1 अगस्त 2026 को नाज़िम इमारत-ए-शरीया मौलाना मुफ़्ती मोहम्मद सईदुर्रहमान क़ासमी की अध्यक्षता में एक परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन्होंने असम की बाढ़ की भयावह स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ 8 से 10 लाख लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ऐसे लोगों तक राहत पहुँचाना हमारा ईमानी और नैतिक दायित्व है।
बैठक में विचार-विमर्श के बाद असम और ओडिशा के लिए अलग-अलग राहत टीमों का गठन किया गया। असम जाने वाली टीम का नेतृत्व मौलाना अहमद हुसैन क़ासमी मदनी (सहायक नाज़िम, इमारत-ए-शरीया) करेंगे। उनके साथ मौलाना मोहम्मद साबिर हुसैन क़ासमी सहित इमारत-ए-शरीया और जामिया रहमानी के अन्य उलेमा भी शामिल होंगे।
ओडिशा जाने वाली राहत टीम का नेतृत्व मौलाना अब्दुल्लाह अनस क़ासमी करेंगे। उनके साथ मौलाना मुफ़्ती अकील अख्तर क़ासमी, मौलाना सिबगतुल्लाह तथा दावत व तबलीग विभाग के चयनित सदस्य भी रहेंगे।
इमारत-ए-शरीया की ये राहत टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचकर स्थानीय जिम्मेदार लोगों के मार्गदर्शन में पीड़ितों की आवश्यकताओं के अनुसार राहत सामग्री उपलब्ध कराएँगी।
नाज़िम इमारत-ए-शरीया ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा में पीड़ितों की सहायता करना और मानव सेवा की भावना से सहयोग देना अत्यंत पुण्य का कार्य है। जिन लोगों को अल्लाह ने इस आपदा से सुरक्षित रखा है, उनकी धार्मिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि वे दिल खोलकर अपने प्रभावित भाइयों की मदद करें तथा उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कुशलता के लिए निरंतर दुआ करते रहें।
इस परामर्श बैठक में मौलाना मुफ़्ती मोहम्मद सना-उल-हुदा क़ासमी (नायब नाज़िम), मुफ़्ती मोहम्मद एहतेकामुल हक़ क़ासमी (कार्यवाहक मुफ़्ती), मौलाना सुहैल अख्तर क़ासमी (नायब क़ाज़ी-ए-शरीअत), मौलाना मोहम्मद अबुल कलाम शम्सी, मौलाना अहमद हुसैन, मौलाना रिज़वान अहमद नदवी, मौलाना कमर अनीस क़ासमी (सभी सहायक नाज़िम), जनाब अब्दुल वहाब अंसारी (प्रभारी, भूमि सुधार विभाग), मौलाना अरशद रहमानी (ऑफिस सचिव), इरफ़ानुल हसन (प्रभारी, बैतुल माल), इम्तियाज़ अहमद (उप-प्रभारी, बैतुल माल), मौलाना शमीम अकबर रहमानी (सहायक क़ाज़ी), मौलाना अब्दुल्लाह अनस क़ासमी, मौलाना मोहम्मद साबिर हुसैन, मौलाना असदुल्लाह, मौलाना मोहम्मद मिन्हाज आलम नदवी, मौलाना मोहम्मद शारिक रहमानी, ख़ुबैब अहमद सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।