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07/09/2024
मुहम्मद इब्न मूसा अल-खवारिज्मी का जन्म 780 ईस्वी के आसपास हुआ था और वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें अब तक के सबसे महत्वपूर...
09/04/2023

मुहम्मद इब्न मूसा अल-खवारिज्मी का जन्म 780 ईस्वी के आसपास हुआ था और वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें अब तक के सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विचारकों के रूप में जाना जाता है!

बीजगणित और एल्गोरिथम के बिना दुनिया वाले कुछ भी माप नहीं सकते थे, ना कुछ construct कर सकते थे। न पैसा होता, न घर, न सड़कें। कोई अस्पताल या खाद्य उत्पादन नहीं, कोई इंटरनेट नहीं, और ना ही कोई रक्षा प्रणाली होती।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि "बीजगणित (Algebra) और एल्गोरिथम के जनक" के रूप में किसे जाना जाता है? यह कोई और नहीं बल्कि ग्रेट इब्ने मूसा अल-खवारिज्मी है।

क्या गणित विज्ञान की भाषा है? यदि ऐसा है, तो हमें उसका हमारे लिए अनुवाद करने के लिए उसका आभारी होना चाहिए। अल-खवारिज्मी आधुनिक इराक के बगदाद में हाउस ऑफ विज़डम के निदेशक बने, बगदाद उस समय इस्लामी साम्राज्य की राजधानी था। उस समय बग़दाद में दुनिया भर के विद्वान जमा थे इब्ने मूसा अल-खवारिज्मी विद्वानों के उस समुदाय का हिस्सा थे जिन्होंने प्राचीन पांडुलिपियों का अनुवाद और अध्ययन किया था। उन्होंने प्राचीन बेबीलोनियाई, ग्रीक और हिंदू विद्वानों की गणितीय अवधारणाओं को मिश्रित और बेहतर बनाया, जिसका गणित के विकास में बहुत बड़ा योगदान रहा है।

पश्चिमी दुनिया में, इसे "एल्गोरिदम" (Algorithm) के रूप में भी जाना जाता है और "एल्गोरिदम" शब्द उनके नाम के लैटिनकरण से लिया गया है, और "बीजगणित" शब्द "अल-जबर" (Al- jabar) के लैटिनीकरण से लिया गया है, जो की उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक का शीर्षक है, जिसमें उन्होंने समीकरणों को हल करने के लिए मौलिक बीजीय विधियों और तकनीकों का परिचय दिया था।

आज इनकी बरसी है एल्गोरिथम के महान गणितज्ञ को खिराज ए अक़ीदत पेश करते हैं ।

राजस्थान के ऐतिहासिक नगर उदयपुर के मोतीमगरी परिसर में अवस्थित अप्रतिम योद्धा हकीम खान सूर की प्रतिमा,उस ऐतिहासिक घटना की...
09/04/2023

राजस्थान के ऐतिहासिक नगर उदयपुर के मोतीमगरी परिसर में अवस्थित अप्रतिम योद्धा हकीम खान सूर की प्रतिमा,उस ऐतिहासिक घटना की मूक साक्षी है,जब हकीम खान सूर ने हल्दी घाटी के युद्ध में मुगल सम्राट अकबर के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था.
यहां इस तथ्य को रेखांकित करना प्रासंगिक होगा कि हल्दी घाटी के युद्ध में मुगल सम्राट अकबर की सेना का नेतृत्व आमेर के कुंवर मानसिंह कछवाहा कर रहे थे, जबकि मेवाड़ के राणा प्रताप की सेना का नेतृत्व हकीम खान सूर कर रहे थे.
निस्संदेह,वीर शिरोमणि राणा प्रताप ने हकीम खान सूर को हल्दी घाटी के युद्ध में हरावल में युद्ध करने का सौभाग्य प्रदान करके मेवाड़ राज्य के जन संघर्ष को जो धर्म निरपेक्ष स्वरूप प्रदान किया था, वह आज भी हमें राष्ट्रीय एकता के परिप्रेक्ष्य में उत्प्रेरित करता है.

आबे   का कुआं महज़ 50 मीटर गहरा हैं और 185 लीटर प्रति सेकंड की दर से पानी पंप करता है, और सबसे कम दर 11 लीटर प्रति सेकंड...
09/04/2023

आबे का कुआं महज़ 50 मीटर गहरा हैं और 185 लीटर प्रति सेकंड की दर से पानी पंप करता है, और सबसे कम दर 11 लीटर प्रति सेकंड है।

और ये कुआं हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के वक्त से आज तक पानी दे रहा हजारों साल बाद भी ना तो इस कुए का पानी कभी सुखा और ना ही कभी इसके पानी में किसी भी तरह का बदलाव आया ज्यादा तर देखा जाता है की वक्त के साथ कुओ के पानी में काई और बैक्टीरिया जमा हो जातें है लेकिन आबे जम जम के कूए के साथ ऐसा कोई मसला नहीं।
अल्लाह रब्बुल इज्ज़त इसी लिए बार बार कुरआन में फरमा रहा है की तुम मेरी कौन कौन सी नेमतो को झुठलाओग ☝️💯 ममोहम्मद शाहशमोहम्मद शाह #मोहम्मद शाह

06/08/2022

Kisi kaam me jaldbaaji nahi karna chahiye.
किसी काम मे जलदबाजी नहीं करना चाहिए.

08/05/2020

कुदरत के फैसले पर कभी शक मत करना . . अगर सजा मिल रही है . . तो गुनाह भी हुआ होगा ! !

02/05/2020

अगर इस वीडियो को देखकर आप को रोना आ रहा है तो रोना मत मां बाप के पास जाना 😥

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