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आज दिनांक 30.06.2026 को माननीय अध्यापक प्रभु सिंह जी राठौड़ (कोटवाद) की विदाई समारोह हुआ.ग्रामवासियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा...
30/06/2026

आज दिनांक 30.06.2026 को माननीय अध्यापक प्रभु सिंह जी राठौड़ (कोटवाद) की विदाई समारोह हुआ.
ग्रामवासियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और समारोह की उत्सव में बदल दिया और उत्सव धूमधाम से मनाया.
धन्यवाद - सरपंच महोदय भालेरी एवम सभी सहयोगी ग्रामवासी का और ख़ास तौर पर उन अध्यापकगण का जो उनकी विदाई में चार चाँद लगाये.
हालाँकि ये कार्यक्रम ग्रामीण लोगों के दबाव के बाद विद्यालय में हुआ वरना प्रधानाचार्य महोदय तो पंचायत भवन में करवाने वाले थे.

माननीय प्रभु सिंह जी के उज्ज्वल भविष्य हो और वो दीर्घकालीन उम्र की कामना करते है !
साधुवाद
अपनी चौपाल
भालेरी

29/06/2026

गाँव से एक सलाह चाहिए थी 🙏
एक मास्टर जी ने संपूर्ण जीवन दिया हो विद्यालय को और उनको सेवानिवृत्त विद्यालय में ना होकर पंचायत भवन में हो तो क्या ये उच्चित है ?

गर्मी बहुत है और स्वास्थ्य के ध्यान रखें !!जींया तावड़ो पड़े बिन्या लागे की ओ फ़ोन ग़लत बतावे इन्या खाल बाले करे ? भालेर...
29/06/2026

गर्मी बहुत है और स्वास्थ्य के ध्यान रखें !!
जींया तावड़ो पड़े बिन्या लागे की ओ फ़ोन ग़लत बतावे इन्या खाल बाले करे ?
भालेरी 🏜️

27/06/2026

भालेरी की करोड़ों की गाँधी आश्रम भूमि: इतिहास, संघर्ष और अस्तित्व की लड़ाई

भालेरी (तारानगर)।

गाँवों की पहचान केवल उनके मकानों और बाजारों से नहीं होती, बल्कि उन धरोहरों से होती है जो पीढ़ियों की स्मृतियों और इतिहास को अपने भीतर समेटे रहती हैं। भालेरी बस स्टैंड के बीचों-बीच स्थित गाँधी आश्रम (खादी भंडार) की भूमि ऐसी ही एक धरोहर है, जो आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।

राजस्व अभिलेखों के अनुसार खसरा संख्या 409/404 में लगभग 0.5058 हेक्टेयर (करीब 5058 वर्गमीटर) भूमि गाँधी आश्रम के नाम दर्ज है। वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से यह भूमि भालेरी की सबसे मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियों में से एक मानी जा सकती है।

जब गाँधी आश्रम था ग्रामीण अर्थव्यवस्था का केंद्र

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि स्वतंत्रता सेनानी स्व. बनवारीलाल बेदी की प्रेरणा और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने के उद्देश्य से इस संस्था की स्थापना हुई थी। उस समय प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री ने इसका शुभारंभ किया था।

बचपन की यादों में बसता गाँधी आश्रम

भालेरी के बुजुर्ग और स्थानीय लोग बताते हैं कि आज जहां बेतरतीब खाली भूखंड दिखाई देता है, वहां कभी खुला परिसर हुआ करता था। बस स्टैंड के प्याऊ से लेकर साहवा रोड तक फैली इस भूमि के बीच से एक आम रास्ता निकलता था।

परिसर में चुने से बने तीन भवन थे, साहवा रोड की तरफ बाउंड्रीवाल थी और एक विशाल जांट (वृक्ष) लोगों के आकर्षण का केंद्र था। बच्चे वहां खेलते थे, राहगीर विश्राम करते थे और कई सामाजिक गतिविधियाँ होती थीं।

1990 से 2002 के बीच यहाँ बाहर से आने वाले लोगों के ठहरने की व्यवस्था भी होती थी। कभी सरकारी चारे की बिक्री की टाल लगी, तो कभी कृषि उत्पादों का अस्थायी भंडारण हुआ। यह स्थान गांव की सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र था।

फिर शुरू हुआ पतन

समय बदला और जमीनों के दाम बढ़ने लगे। धीरे-धीरे गाँधी आश्रम की गतिविधियाँ समाप्त होती गईं। भवन जर्जर हो गए, बाउंड्रीवाल गायब हो गई और संस्था का नाम केवल कागजों तक सीमित रह गया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों की उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह बेशकीमती भूमि धीरे-धीरे अतिक्रमण और विवादों के घेरे में आती चली गई। आज स्थिति यह है कि नई पीढ़ी के अधिकांश युवाओं को यह तक पता नहीं कि बस स्टैंड पर गाँधी आश्रम नाम की कोई भूमि भी मौजूद है।

जब जमीन के कागजात भी बने चर्चा का विषय

गाँधी आश्रम की जमीन को लेकर विवाद और चर्चाएँ नई नहीं हैं। वर्षों पहले एक चर्चित घटना में सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष बेदी से सुजानगढ़ मैं कथित रूप से पिस्तौल दिखाकर लूटपाट की गई थी। समाचारों के अनुसार उनके बैग में गाँधी आश्रम भूमि से संबंधित दस्तावेज भी मौजूद थे।

उस समय यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी थी और लोगों ने इसे गाँधी आश्रम की जमीन से जुड़े विवादों से भी जोड़कर देखा था।

रिकॉर्ड आज भी मौजूद हैं

उपलब्ध जमाबंदी रिकॉर्ड बताते हैं कि भूमि का राजस्व रिकॉर्ड आज भी मौजूद है। यही कारण है कि ग्रामीणों की मांग है कि—

* भूमि का पुनः सीमांकन कराया जाए।
* पुराने रिकॉर्ड और परिसंपत्तियों की जांच हो।
* यदि अतिक्रमण है तो उसे हटाया जाए।
* गाँधी आश्रम की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
* इस भूमि का उपयोग जनहित और ग्राम विकास के कार्यों में किया जाए।

क्या फिर लौटेगा गाँधी आश्रम?

भालेरी के लोग मानते हैं कि यदि प्रशासन गंभीरता से पहल करे तो यह भूमि पुनः गांव की पहचान बन सकती है। यहाँ पुस्तकालय, कौशल विकास केंद्र, सामुदायिक भवन, खादी केंद्र या कोई अन्य सार्वजनिक सुविधा विकसित की जा सकती है।

गाँधी आश्रम की कहानी केवल जमीन की कहानी नहीं है। यह उस दौर की कहानी है जब गांव आत्मनिर्भरता, रोजगार और सामाजिक सहयोग की मिसाल हुआ करते थे।

भालेरी की गाँधी आश्रम भूमि और प्याऊ केवल जमीन के टुकड़े नहीं, बल्कि हमारे गांव का इतिहास हैं। सवाल यह है कि क्या यह इतिहास फिर से जीवित होगा या केवल कागजों में दर्ज रह जाएगा?

अतिक्रमण हटाओ मुहिम में ये नोटिस लगभग सभी दुकानदारों को मिला होगा !!अब आगे की क्या राय है मोट्यारों !!चिमनी चसेगी या मंत...
22/06/2026

अतिक्रमण हटाओ मुहिम में ये नोटिस लगभग सभी दुकानदारों को मिला होगा !!
अब आगे की क्या राय है मोट्यारों !!
चिमनी चसेगी या मंत्री विधायक या सांसद नाको लगा देसी !!

09/05/2026

एक और मुग़ल साम्राज्य का पतन

25/04/2026

आजकल एक चर्चा चल रही है कि भारत दुनिया का सबसे पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और आने वाले सालों में तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा ऐसी कुछ चीज आ रही है लेकिन एक चीज क्या सबको पता है कि भारत गरीबी में 140 से 150 रेंक पर आता है और पाकिस्तान 150 से 160 की रैंक पर आता है यानी 195 देश में से अगर आप 150 पर बैठे हो गरीबी के मामले में तो यह आंकड़े तो कोई मायने नहीं रखते भारत ने UK को पीछे छोड़ दिया है लेकिन उनके जैसीGDP PER CAPITA होने में भारत को कम से कम 500 साल और चाहिए क्योंकि जानसख्या कंट्रोल होंगी नहीं और क्रप्शन रुकेगा नहीं भारत वही का वही रहेगा

28/03/2026

भालेरी हॉस्पिटल की सचाई आप भी सुनें और आगें भी शेयर करे क्या पता जिम्मेदारों की नींद खुल जाये ।

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