13/10/2025
🗳️ अतरी विधानसभा: जमीनी सिपाही बनाम परिवारवाद की राजनीति
पटना / गया | विशेष रिपोर्ट
आगामी विधानसभा चुनावों में इस बार अतरी सीट हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम पार्टी) के खाते में आई है। अब पार्टी के अंदर टिकट की दौड़ तेज हो गई है। इस रेस में दो नाम प्रमुख रूप से सामने हैं — श्याम सुंदर शरण और रोमित कुमार।
दोनों ही पार्टी प्रवक्ता हैं, लेकिन इनकी राजनीति, सोच और पहचान एकदम अलग धरातल पर खड़ी है।
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🔹 श्याम सुंदर शरण — पार्टी के सच्चे सिपाही
श्याम सुंदर शरण जी नवादा जिले के हिसुआ (नारायणपुर) के निवासी हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने अपनी पहचान मेहनत, सादगी और निष्ठा से बनाई है।
वे हम पार्टी के मुख्य प्रवक्ता हैं और राष्ट्रीय न्यूज चैनलों पर अक्सर मांझी जी की नीतियों का प्रतिनिधित्व करते दिखाई देते हैं।
पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से वे लगातार अतरी क्षेत्र में जनता के बीच सक्रिय हैं — गांवों, पंचायतों और स्थानीय जनसमस्याओं से सीधा जुड़ाव बनाते हुए।
उनकी सबसे बड़ी ताकत है उनकी सादगी और सहजता — न कोई तामझाम, न दिखावा।
वे उन चंद नेताओं में से हैं जो पार्टी के विचार को जमीन तक पहुँचाने का काम बिना किसी स्वार्थ के करते हैं।
मांझी जी के “समान अवसर” और “सच्ची भागीदारी” के सिद्धांतों पर चलने वाले श्याम सुंदर शरण जी वास्तव में हम पार्टी के असली सिपाही कहे जा सकते हैं।
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🔹 रोमित कुमार — परिवार और पैसों के सहारे की राजनीति
वहीं दूसरी ओर, रोमित कुमार का परिचय उनके काम से कम, उनके परिवार से अधिक जुड़ा हुआ है।
वे पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार और टेकारी विधायक अनिल कुमार के भतीजे हैं।
साथ ही, ज्ञान भारती टेकारी संस्थान के मालिक भी हैं।
हालांकि उन्हें भी पार्टी प्रवक्ता कहा जाता है, लेकिन टीवी डिबेट्स या जनसंपर्क में उनकी सक्रियता बहुत सीमित रही है।
पार्टी सूत्रों की मानें तो यदि टिकट उन्हें मिलता है, तो वह परिवारिक प्रभाव और आर्थिक सामर्थ्य के दम पर होगा — जो न केवल संगठन के लिए गलत संदेश देगा, बल्कि पार्टी की मूल भावना के विपरीत भी जाएगा।
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🔹 कार्यकर्ताओं का मनोबल और पार्टी का संदेश
हम पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है उसका जमीनी कार्यकर्ता वर्ग।
ऐसे में यदि टिकट श्याम सुंदर शरण जी जैसे समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता को दिया जाता है, तो इससे पार्टी के हर कार्यकर्ता के मन में यह विश्वास पैदा होगा कि
> “मेहनत करने वालों को एक दिन पहचान मिलती है।”
श्याम सुंदर शरण जी हिसुआ क्षेत्र से आते हैं, जो अतरी विधानसभा की सीमा से सटा हुआ इलाका है। वे वर्षों से इस क्षेत्र की जनता के साथ जुड़े हुए हैं, जबकि रोमित कुमार की पहचान अभी तक स्थानीय स्तर पर सीमित ही रही है।
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🔹 निष्कर्ष
राजनीति में बदलाव तब आता है जब टिकट वंश और वैभव से नहीं, संघर्ष और सेवा से तय होते हैं।
श्याम सुंदर शरण जी जैसे नेताओं को आगे लाना न केवल एक व्यक्ति का चयन होगा, बल्कि यह पार्टी की विचारधारा को मजबूत करने का संदेश भी देगा —
कि हम पार्टी में टिकट पैसे से नहीं, परिश्रम और पार्टी निष्ठा से मिलता है।