21/09/2026
50 साल बाद खुला जमीनों के पुराने रिकॉर्ड का राज! 1983 के बंदोबस्त को लेकर त्यूनी तहसील पहुंचे दर्जनों किसान
गरीब एवं परेशान किसानों ने दर्ज कराई शिकायतें — 1951-52 एवं 1983 के अभिलेखों से जमीनों की जांच और विधिक कार्रवाई की मांग
त्यूनी, 21 सितंबर 2026।
जौनसार-बावर क्षेत्र के गरीब एवं परेशान किसान आज अपनी जमीनों से संबंधित शिकायतों को लेकर त्यूनी तहसील परिसर पहुंचे। दर्जनों किसानों ने अपनी-अपनी लिखित शिकायतें एवं संबंधित राजस्व अभिलेख तहसील प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करते हुए अपनी पूर्वजों की भूमि की जांच कराने तथा यदि किसी भूमि का नामांतरण अथवा इंद्राज नियम-विरुद्ध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की।
किसानों ने 1951-52 एवं 1983 के बंदोबस्त अभिलेखों, पुराने खाता नंबर, नए खाता नंबर तथा वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित भूमि की जांच की मांग उठाई।
पांच वर्षों से “जन, जंगल और जमीन” के मुद्दे पर संघर्ष
रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल पिछले लगभग पांच वर्षों से “जन, जंगल और जमीन” के मुद्दे को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है। संगठन के अनुसार आज इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पड़ाव सामने आया, जब प्रभावित परिवारों ने अपनी-अपनी फाइलें तैयार कर पुराने राजस्व अभिलेखों के आधार पर शिकायतें प्रशासन के समक्ष रखीं।
संगठन का कहना है कि जौनसार-बावर के जनजातीय क्षेत्र में जनजातीय भूमि के बाहरी/गैर-जनजातीय व्यक्तियों के नाम अंतरण एवं इंद्राज से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं। किसानों का आरोप है कि कुछ मामलों में उनके पूर्वजों की भूमि के अभिलेखों में बाद में परिवर्तन हुआ और भूमि अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दी गई, जिसकी जानकारी संबंधित परिवारों को वर्षों बाद मिली।
50 वर्षों बाद सामने आई जमीनों की जानकारी
किसानों एवं संगठन की ओर से यह सवाल उठाया गया कि यदि वर्ष 1983 में भूमि के अभिलेखों में किसी प्रकार का नियम-विरुद्ध परिवर्तन या नामांतरण हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। किसानों ने संबंधित अधिकारियों एवं अभिलेखों की भी जांच कर जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की।
इस दौरान किसानों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी भी की।
600 से 700 बीघा भूमि से जुड़ी शिकायतें
रूद्रसेना के अनुसार प्रारंभिक तौर पर निजी भूमि, बंजर भूमि तथा बिना नंबर वाली भूमि सहित लगभग 600 से 700 बीघा भूमि से संबंधित शिकायतें सामने आई हैं। संगठन ने मांग की है कि प्रत्येक मामले की 1951-52 एवं 1983 के बंदोबस्त अभिलेखों तथा वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड से विधिवत जांच की जाए।
यदि किसी भूमि का इंद्राज अथवा नामांतरण नियम-विरुद्ध पाया जाता है तो नियमानुसार उसे निरस्त कर वास्तविक हकदारों के अधिकारों की रक्षा की जाए।
मुख्यमंत्री एवं जिलाधिकारी के समक्ष भी रखा गया विषय
रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि संगठन ने पिछले पांच वर्षों से लगातार इस विषय को उठाया है और प्रभावित परिवारों को अपने पुराने राजस्व अभिलेख तलाशने तथा अपनी शिकायतें प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया है।
उन्होंने बताया कि इस प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष भी विषय रखा गया है। इसके बाद जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान से भी मुलाकात कर प्रकरण की जानकारी दी गई।
इन किसानों की शिकायतें भी प्रस्तुत की गईं
आज प्रस्तुत शिकायतों में शामिल नामों में—
गोपाल सिंह पुत्र ज्ञान सिंह — ग्राम चौसाल
भगत सिंह पुत्र खड़कू
दौलत राम पुत्र चांदराम
तुलाराम,शिवदत्त
भगत सिंह — सैंज
सीताराम पुत्र बुद्धि सिंह
जय मोहन शर्मा
बालक राम
ज्ञानचंद्र पुत्र धनसिंह
धर्म सिंह
चंदन सिंह
प्रेमनाथ
कमली देवी पुत्री गुलाबू
सिंगर राम पुत्र उदय राम
तथा बंजर जमीनों एवं बिना नंबर वाली भूमि से संबंधित लिखित शिकायतें भी प्रस्तुत की गईं।
इन शिकायतों को मनोज बिज्लवान, अध्यक्ष त्यूनी, एवं राकेश उत्तराखंडी, संस्थापक रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल की ओर से भी प्रशासन के समक्ष रखा गया।
“यह किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध अभियान नहीं” — राकेश उत्तराखंडी
राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध अभियान नहीं है, बल्कि पुराने राजस्व अभिलेखों की वास्तविक स्थिति सामने लाने और प्रभावित किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए दस्तावेजी एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच कराने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई राजस्व रिकॉर्ड, उपलब्ध दस्तावेजों और कानून के आधार पर निष्पक्ष रूप से होनी चाहिए।
उप जिलाधिकारी त्युनी ने कहा कि जिन किसानों द्वारा शिकायत पत्र दिया गया है उन जमीनों पर विधिक रूप से कार्रवाई की जाएगी तथा जो जमीन गलत तरीके से हम लगी है जल्दी ही उसको निरस्त करेंगे।
इस अवसर पर उपस्थित रहे—
भानु प्रताप सिंह राणा — संरक्षक, रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल
मनोज बिज्लवान — अध्यक्ष
विजयपाल ढोभाल — उपाध्यक्ष
मंगतराम ठाकुर — वरिष्ठ नागरिक एवं पूर्व प्रधान, ग्राम पंचायत झिठाड़
श्रीकांत शर्मा
जगत
बाबूराम डोभाल
रमेश डोभाल
भगतराम ढोभाल
इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।