हमरा बिहार हमरा सवाल

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हमरा बिहार – हमरा सवाल-
बिहार की सच्ची तस्वीर, बेबाक आवाज़ और जनता के हक़ की पुकार।
हम यहाँ हर उस मुद्दे पर सवाल उठाते हैं जिसे सत्ता और व्यवस्था अनसुना कर देती है — शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार, अन्याय और हर वो दर्द जो आम बिहारी झेल रहा है।

01/06/2026

सवाल हर उनलोगों से पूछा जायेगा जिन्होंने बिहार को बर्बाद किया है

R.J.D - राष्ट्रीय जनता दल
Samrat Choudhary
Lalganj Live
News Live
Chirag Paswan
City Post

05/05/2026

आखिर क्या फर्क है बिहार के लोगों और उन राज्यों के लोगों में जो आज ज्यादा विकसित हैं, जैसे तमिलनाडु (चेन्नई)?

बिहार में आज भी कई लोग बुनियादी सरकारी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं—यहां तक कि 5 किलो राशन के लिए, जो कई बार पूरा भी नहीं मिलता। फिर भी ऐसे छोटे-छोटे लाभों के बदले वोट प्रभावित हो जाते हैं। थोड़े समय के फायदे, लंबे समय के फैसलों पर भारी पड़ जाते हैं।

वहीं अगर हम तमिलनाडु को देखें, तो वहां के लोग जोखिम उठाने के लिए तैयार रहते हैं, नई सोच और नई नेतृत्व को मौका देते हैं, अगर उन्हें लगता है कि इससे राज्य का विकास होगा। क्यों? क्योंकि वे भविष्य, विकास और प्रगति के बारे में सोचते हैं।

यह किसी की आलोचना नहीं है, बल्कि खुद से सवाल करने का समय है।

बिहार में आज भी कई वोट जाति या छोटे लाभों के आधार पर दिए जाते हैं। लेकिन आज का समय बदल चुका है—यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है। हमें भी अपनी सोच बदलनी होगी और विकास को प्राथमिकता देनी होगी।

असली बदलाव नीचे से शुरू होता है। पंचायत चुनाव से ही हमें शिक्षित, सक्षम और ईमानदार लोगों को समर्थन देना चाहिए, जो अपने कर्तव्यों और अधिकारों को समझते हों। दुख की बात है कि आज भी कई जनप्रतिनिधि अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं जानते, फिर भी हम वोट देते समय इन बातों पर ध्यान नहीं देते।

मैं बिहार के सभी लोगों से विनम्र निवेदन करता हूँ:
आइए सोच बदलें, समझदारी से निर्णय लें और छोटे लाभों के बजाय राज्य के भविष्य को प्राथमिकता दें।

बदलाव का समय अब है।

भारत की एकता अखण्डता चुर चुर करने के लिए अमेरिकी तंत्र सुचारू रूप से काम करने में जुट गई है...अब हमारे देश के युवाओ पर न...
01/02/2026

भारत की एकता अखण्डता चुर चुर करने के लिए अमेरिकी तंत्र सुचारू रूप से काम करने में जुट गई है...अब हमारे देश के युवाओ पर निर्भर कर्ता है कि इस षड्यंत्र से कैसे बचा जाय

Narendra Modi जी को इस पर मुखरता से भारत के जनता के बीच में जवाब रखना चाहिए

क्या बेशर्मी वाला मामला है ये

Epstein files में नरेंद्र मोदी का नाम आ गया है। अमेरिका के सीरियल रेपिस्ट, बाल यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफरी एपस्टीन ने 9 जुलाई 2017 को एक मेल में लिखा....जो इस प्रकार है

"The Indian Prime Minister Modi took advice and danced and sang in Israel for the benefit of the US president. They had met a few weeks ago. IT WORKED!"

एपस्टीन का साफ कहना है कि 'मोदी ने मुझसे सलाह ली और अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए इजराइल में जाकर नाचे और गाए। यह भी कहा कि ये काम कर गया।'

• याद रहे- प्रधानमंत्री मोदी 4 से 6 जुलाई 2017 के बीच इजराइल दौरे पर थे। इसके तीन दिन बाद एपस्टीन ने यह मेल लिखा है

• इजराइल दौरे से ठीक पहले 25-26 जून 2017 को मोदी, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे

》जेफरी एपस्टीन के मेल की कड़ियों को जोड़ें तो समझ आता है कि मोदी, जून 2017 में अमेरिका गए और वहां एपस्टीन से सलाह ली

》इसके एक हफ्ते बाद (4 से 6 जुलाई 2017) मोदी इजराइल पहुंचे और सलाह के मुताबिक- वहां नाचे और गाए और काम हो गया

अब साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी का जेफरी एपस्टीन से बहुत ही गहरा और पुराना नाता है, जो भारत के लिए शर्मनाक है।

यह मामला राष्ट्रीय गरिमा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का है, जिसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को जवाब देना चाहिए।

सवाल है:

1. नरेंद्र मोदी, जेफरी एपस्टीन से कैसी सलाह ले रहे थे?
2. मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के किस फायदे के लिए इज़राइल में नाच और गा रहे थे?
3. एपस्टीन ने लिखा है- "IT WORKED!"... तो इसका क्या मतलब है?

नरेंद्र मोदी जी, देश जवाब मांग रहा है। सीरियल रेपिस्ट एपस्टीन से आपका क्या रिश्ता है?

21/01/2026

बिहार में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ हुआ बलात्कार सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के मुँह पर तमाचा है।

यह सिर्फ एक लड़की की चीख नहीं है,
यह उस हर माँ-बाप की सिसकी है जो अपनी बेटी को सपने लेकर घर से बाहर भेजता है।
यह उस हर छात्रा का डर है जो किताबें लेकर घर से निकलती है और यह सोचती है—
“क्या मैं आज सुरक्षित लौट पाऊँगी?”

लेकिन सवाल यह है कि
क्या बिहार की सरकार सो रही है?
क्या प्रशासन सिर्फ फाइलों में कानून चलाता है?
क्या अधिकारी सिर्फ मोटी-मोटी तनख्वाह लेने और AC कमरों में बैठने के लिए हैं?

आखिर कब जागेगा यह सिस्टम?
NEET जैसी परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा,
जो डॉक्टर बनकर लोगों की जान बचाना चाहती थी,
आज खुद न्याय के लिए तरस रही है।

और सिस्टम?
वह हमेशा की तरह
👉 जाँच का भरोसा दे रहा है
👉 कमेटी बना रहा है
👉 बयान जारी कर रहा है
👉 और कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा

क्या यही है सुशासन?
क्या यही है कानून का राज?

सवाल सरकार से है
जब चुनाव आते हैं तो
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे लगते हैं
पोस्टर लगते हैं
भाषण होते हैं
तालियाँ बजती हैं

लेकिन जब वही बेटी दरिंदगी का शिकार होती है तो
सरकार की ज़ुबान क्यों लड़खड़ा जाती है?
कार्रवाई में देरी क्यों होती है?
आरोपियों के नाम छिपाए क्यों जाते हैं?

क्या इसलिए कि सिस्टम ताकतवरों और बड़े अपराधियों को बचाने में व्यस्त है?

पुलिस क्या कर रही थी?
स्थानीय प्रशासन कहाँ था?
अगर अपराधियों में जरा भी डर होता कानून का,
तो क्या इतनी हिम्मत होती?

लेकिन नहीं,
क्योंकि अपराधियों को पता है—
👉 कुछ दिन शोर होगा
👉 सोशल मीडिया पर गुस्सा निकलेगा
👉 फिर सब शांत हो जाएगा

और वे बच निकलेंगे।

अधिकारी सिर्फ तनख्वाह लेने के लिए हैं क्या?
ईमानदारी से जवाब दीजिए—

क्या अधिकारी सिर्फ
✔ मोटा वेतन
✔ सरकारी गाड़ी
✔ बंगला
✔ पेंशन

के लिए बैठे हैं?

जनता की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी नहीं है क्या?
छात्राओं की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी नहीं है क्या?

अगर नहीं,
तो यह साफ कहा जाए कि
यह सिस्टम सिर्फ अमीरों, बड़े व्यापारियों और रसूखदार अपराधियों के लिए है।

शिक्षा का सपना, सुरक्षा का दुःस्वप्न
NEET की तैयारी करना
बिहार जैसे राज्य में अपने आप में संघर्ष है—
✔ कोचिंग
✔ किराया
✔ आर्थिक बोझ
✔ मानसिक दबाव

और ऊपर से
जान का खतरा?

क्या पढ़ने वाली लड़की की यही कीमत है इस राज्य में?

समाज भी दोषी है
सिर्फ सरकार नहीं,
हम समाज भी दोषी हैं—

जब तक मामला हमारे घर तक नहीं आता
हम चुप रहते हैं
जब तक हमारी बेटी नहीं होती
हम “दुखद घटना” लिखकर आगे बढ़ जाते हैं

यही चुप्पी अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत है।

कब तक?
कब तक
लड़कियाँ डर में जिएँगी?
कब तक
माँ-बाप काँपते हाथों से बेटी को बाहर भेजेंगे?
कब तक
नेताओं के लिए यह सिर्फ “राजनीतिक मुद्दा” रहेगा?

हमें जवाब चाहिए
हमें चाहिए—
✔ त्वरित और निष्पक्ष जांच
✔ आरोपियों को कड़ी से कड़ी सज़ा
✔ अधिकारियों की जवाबदेही
✔ छात्राओं की सुरक्षा के ठोस इंतजाम
✔ सिर्फ बयान नहीं, एक्शन

यह पोस्ट सिर्फ गुस्सा नहीं है
यह पोस्ट
👉 एक चेतावनी है
👉 एक सवाल है
👉 एक आह है

अगर आज भी हम चुप रहे
तो कल फिर कोई बेटी
किसी कोचिंग से
किसी हॉस्टल से
किसी सपने से
उठा ली जाएगी।

और फिर हम लिखेंगे—
“दिल दहला देने वाली घटना…”

नहीं!
अब नहीं!

अगर सरकार और सिस्टम
लड़कियों को सुरक्षा नहीं दे सकता
तो फिर वह किस बात की सरकार है?

और अगर अधिकारी
जनता की रक्षा नहीं कर सकते
तो उन्हें कुर्सी पर बैठने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

न्याय चाहिए, अभी चाहिए।
बिहार की बेटियों के लिए, भारत की बेटियों के लिए।

अगर आपको भी लगता है कि
यह सिर्फ एक खबर नहीं,
बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी है—

तो इस आवाज़ को दबने मत दीजिए।
शेयर कीजिए।
सवाल पूछिए।
क्योंकि खामोशी सबसे बड़ा अपराध है।

21/01/2026

आजकल हम देख रहे हैं कि कुछ लोग आरक्षण पर पूरा ज्ञान दे रहे हैं। कहा जा रहा है कि आरक्षण खत्म करो और नौकरियों में समानता लाओ।

मैं बिल्कुल स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि इस आरक्षण से न मुझे कोई विशेष लाभ है और न ही मेरा इससे कोई सीधा लेना-देना है।
लेकिन मैं उन लोगों से एक सवाल ज़रूर पूछना चाहता हूँ—
अगर आरक्षण खत्म ही करना है, तो इतनी जल्दी सिर्फ़ नौकरियों में ही क्यों?

क्या आपने कभी सामाजिक स्तर पर आरक्षण खत्म करने की बात की है?
या वहाँ बात आते ही डर लगने लगता है?

आज भी छोटी जातियों के लोगों की समाज में क्या स्थिति है, क्या यह किसी से छिपा हुआ है?
हर जगह ऊँची कुर्सियों पर ज़्यादातर ऊँची जाति के लोग ही क्यों बैठे हैं?
क्या सच में सब कुछ केवल योग्यता के आधार पर हुआ है?

हो सकता है मेरी इस पोस्ट से कुछ लोगों को बुरा लगे,
लेकिन क्या हम यह नहीं जानते कि जब किसी बड़ी जाति का व्यक्ति किसी जगह सेट हो जाता है,
तो वह अपने जान-पहचान वालों को उसी विभाग, उसी क्षेत्र, उसी राज्य (जैसे बिहार) में आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश करता है?
क्या यह बात किसी से छिपी हुई है?

देश के बड़े-बड़े मंदिरों और सरकारी संस्थानों को देख लीजिए—
वहाँ के ज़्यादातर ट्रस्टी और पदाधिकारी ऊँची जातियों से ही होते हैं।
क्या वहाँ सामाजिक समरसता की ज़रूरत नहीं है?

अगर हम ध्यान से देखें, तो आज देश में जिस तरह से छोटी जातियों के लोग धर्म परिवर्तन कर रहे हैं,
उसके लिए कहीं न कहीं ऊँची जातियों की भूमिका भी ज़िम्मेदार है—
और इसमें ब्राह्मण वर्ग का योगदान नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

अक्सर देखा गया है कि ज़्यादातर ब्राह्मण लोग ऊँची जाति के घरों में पूजा-पाठ कराने को सौभाग्य मानते हैं,
लेकिन वही पूजा अगर किसी छोटी जाति के घर करनी हो तो उसे अपमान या पाप समझा जाता है।
तो फिर बताइए, ऐसे में धर्म कैसे बचेगा?

मेरा मानना है कि
आरक्षण को नौकरियों और व्यवसायों से खत्म करने की बात करने से पहले,
समाज में सामाजिक समरसता लाना ज़रूरी है।
छोटी-बड़ी जातियों के बीच भेदभाव खत्म कीजिए,
उसके बाद आरक्षण खत्म करने की माँग पर चर्चा कीजिए।

बाकी, आप सभी अपने-अपने विचार रख सकते हैं।
इस पोस्ट का समर्थन या विरोध—दोनों आपके अधिकार हैं।

लेकिन एक बात साफ़ है—
अगर किसी ने गाली-गलौज या अनावश्यक अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया,
तो उसे हल्के में न लिया जाए।
उसके परिणाम भी उसी अनुरूप हो सकते हैं।

17/11/2025

आज मैं बिहार की उस जनता को हृदय से नमन करना चाहता हूँ, जिसने इतनी बड़ी त्रासदी और कठिन परिस्थिति के बावजूद NDA सरकार पर अपना भरोसा जताया और उसे प्रचंड बहुमत देकर फिर से सत्ता में बैठाया। यह जनादेश केवल जीत नहीं है, बल्कि बिहार की उम्मीदों, उसके सपनों और उसके भविष्य की आवाज़ है।

मेरी बिहार के सभी नव-निर्वाचित विधायकों से, और विशेषकर NDA के होने वाले मंत्रियों से विनम्र गुज़ारिश है—
कृपया जनता के विश्वास की लाज रखिए।
अब समय आ गया है कि हम वादों से आगे बढ़कर बिहार को विकास की राह पर तेज़ी से ले जाएँ। बिहार का गरीब, वंचित और कठिनाइयों में जी रही जनता अब और अपमान सहने की स्थिति में नहीं है। बार-बार सुनना पड़ता है कि “बिहारी” एक गाली जैसा शब्द बन जाता है—यह पीड़ा हर उस व्यक्ति की है जो बिहार की मिट्टी से आता है।

मुझे उम्मीद नहीं—पूरा भरोसा है—कि इस बार NDA सरकार बिहार के विकास को प्राथमिकता देगी। क्योंकि यह सच है कि—
बिहार के बिना देश का विकास संभव ही नहीं है।
अगर देश को आगे बढ़ाना है, तो बिहार को आगे ले जाना अत्यंत ज़रूरी है। यह बात हमारे सभी नेताओं को समझनी होगी।

आइए मिलकर एक ऐसे बिहार का निर्माण करें जो सम्मानित हो, विकसित हो और अपने युवाओं को अवसर दे। बिहार बदलेगा, तभी भारत बदलेगा—और यह बदलाव आपके हाथों में है।

Samrat Choudhary Mangal Pandey Chirag Paswan Upendra Kushwaha

आज लालगंज में टिकट बंटवारे को लेकर जो घटनाएं हुईं, उन्हें देखकर हर कार्यकर्ता और आम नागरिक के मन में एक ही सवाल उठा — क्...
16/10/2025

आज लालगंज में टिकट बंटवारे को लेकर जो घटनाएं हुईं, उन्हें देखकर हर कार्यकर्ता और आम नागरिक के मन में एक ही सवाल उठा — क्या वाकई मेहनत, समर्पण और जनता से जुड़ाव का कोई मूल्य नहीं रह गया?

महागठबंधन का निर्णय कई समर्पित कार्यकर्ताओं की भावना के विपरीत लगता है। खासकर तब, जब शिवानी जी ने पूरे दिल से, निडर होकर, जनता के बीच रहकर संघर्ष किया।
उन्होंने धूप, बारिश और कठिन परिस्थितियों में भी जनता से जुड़ाव बनाए रखा — यही असली जननेता की पहचान है।

शिवानी जी केवल एक नाम नहीं, बल्कि लालगंज की बेटी हैं — हमारी, आपकी, हर उस व्यक्ति की जो सच्चे बदलाव की उम्मीद रखता है।
जनता ने जिस तरह से उनका समर्थन किया है, वह इस बात का प्रमाण है कि असली ताकत जनता के साथ खड़े रहने में होती है, न कि टिकट या पद में।

हमारा मानना है कि यदि मौका मिलता, तो शिवानी जी R.J.D - राष्ट्रीय जनता दल को इस क्षेत्र में मज़बूत स्थिति में लाकर खड़ा कर सकती थीं और बीजेपी-एनडीए के सामने सशक्त विकल्प बन सकती थीं।
लेकिन निर्णय चाहे जो भी हो, जनता का दिल अब भी उनके साथ है।

🔸 लालगंज की जनता से अपील:
अपनी बेटी को आगे बढ़ाइए।
वोट से जवाब दीजिए।
ईमानदारी, सेवा और संघर्ष की जीत सुनिश्चित कीजिए।

जय हिंद 🇮🇳

14/08/2025

📢 कब तक चुप रहोगे, बिहार?

वैशाली ज़िले के लालगंज प्रखंड के रिखर गाँव का बेटा रोज़ी-रोटी की तलाश में असम पहुँचा। नर्स और केयरटेकर की नौकरी मिली, लेकिन वेतन नहीं… उल्टा मारपीट, अपमान और शोषण झेलना पड़ा। और अब खबर आई — छत से गिरकर मौत।

क्या यह वाकई हादसा था?
या किसी ने उसकी चुप आवाज़ हमेशा के लिए बंद कर दी?

सरकार चुप।
विपक्ष चुप।
बिहार का बेटा मिट्टी में मिल गया — पर सत्ता के गलियारों में सन्नाटा है।

मुंबई, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल… हर जगह बिहारी मज़दूरों के साथ अन्याय।
कुछ दिन पहले हरियाणा में पुरनिया के एक मजदूर का हाथ मशीन में कट गया, मालिक उसे जंगल में फेंक कर भाग गया। ज़िंदा तो बचा, लेकिन हाथ चला गया।

गाँव खाली हो रहे हैं, बिहार वीरान हो रहा है…
क्यों? किस श्राप का दंश झेल रहे हैं हम?

📢 सवाल सीधा है —
नौजवानों की लाशें और टूटी हड्डियाँ भेजने के लिए ही क्या बिहार की माताएँ अपने बेटे पालती हैं?
कब टूटेगा ये मौन? कब जागोगे?

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