Rakesh dubey

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18/05/2025

हे भगवान क्या-क्या देखना पड़ता है

बालकाण्ड चौपाई १९० ॥ नौमी तिथि मधु मास पुनीता । सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता ॥मध्यदिवस अति सीत न घामा । पावन काल लोक बिश्र...
05/04/2025

बालकाण्ड चौपाई १९० ॥ नौमी तिथि मधु मास पुनीता । सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता ॥

मध्यदिवस अति सीत न घामा । पावन काल लोक बिश्रामा ॥

सीतल मंद सुरभि बह बाऊ । हरषित सुर संतन मन चाऊ ॥

बन कुसुमित गिरिगन मनिआरा । स्त्रवहिं सकल सरिताऽमृतधारा ॥

सो अवसर बिरंचि जब जाना । चले सकल सुर साजि बिमाना ॥

गगन बिमल सकुल सुर जूथा । गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा ॥

बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी । गहगहि गगन दुंदुभी बाजी ॥

अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा । बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा ॥

दो॰ सुर समूह बिनती करि पहुँचे निज निज धाम । जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम ॥

१९१ ॥ छं॰ भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी । हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ॥

लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी । भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी ॥

कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता । माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता ॥

करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता । सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता ॥

ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै । मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै ॥

उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै । कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥

माता पुनि बोली सो मति डौली तजहु तात यह रूपा । कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा ॥

सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा । यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा ॥

दो॰ बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार । निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ॥

मेरे आराध्य प्रभु श्रीराम लला सरकार की जय हो 🤗🙏🙏🚩🚩

नाम,हैसियत और फायदा देख कर ताल्लुक़ बढ़ानाये बहुत मजबूत निशानियाँ है बहुत कमजोर लोगों की... 👍
23/02/2025

नाम,हैसियत और फायदा देख कर ताल्लुक़ बढ़ाना
ये बहुत मजबूत निशानियाँ है बहुत कमजोर लोगों की... 👍

22/02/2025
15/01/2025

सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ।
हानि लाभु जीवनु मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ॥171॥

भावार्थ
मुनिनाथ ने बिलखकर (दुःखी होकर) कहा- हे भरत! सुनो, भावी (होनहार) बड़ी बलवान है। हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-पयश, ये सब विधाता के हाथ हैं॥171॥

30/12/2024

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