14/04/2026
भगवान विष्णु परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं।
पुराणों में त्रिमूर्ति भगवान विष्णु को विश्व या जगत का पालनहार कहा गया है। त्रिमूर्ति के अन्य दो रूप ब्रह्मा और
शिव को माना जाता है। ब्रह्मा जी को जहाँ विश्व का सृजन करने वाला माना जाता है, वहीं शिव जी को संहारक माना
गया है। मूलतः भगवान विष्णु, शिव तथा ब्रह्मा भी एक ही हैं यह मान्यता भी बहुशः स्वीकृत रही है। न्याय को प्रश्रय
अन्याय के विनाश तथा जीव (मानव) को परिस्थिति के अनुसार उचित मार्ग-ग्रहण के निर्देश हेतु विभिन्न रूपों में
अवतार ग्रहण करनेवाले के रूप में भगवान विष्णु मान्य रहे हैं। कल्की अवतार १०वां (आखिरी) अवतार है।जब
भी दुनिया को बुराई, अराजकता और विनाशकारी ताकतों से खतरा होता है, तो विष्णु ब्रह्मांडीय व्यवस्था को
बहाल करने और धर्म की रक्षा के लिए अवतार के रूप में अवतरित होते हैं। दशावतार विष्णु के दस प्राथमिक
अवतार हैं। इन दस में से राम और कृष्ण सबसे महत्वपूर्ण हैं
।[1]पुराणानुसार भगवान विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी हैं। पौराणिक कथा के अनुसार तुलसी भी भगवान् विष्णु को लक्ष्मी के समान ही प्रिय है
[2] और इसलिए उसे 'विष्णुप्रिया' के रूप में मान्यता प्राप्त है। भगवान विष्णु का निवास क्षीरसागर है। उनका शयन शेषनाग के ऊपर है। उनकी नाभि से कमल उत्पन्न होता है जिसमें ब्रह्मा जी स्थित हैं।
वह अपने नीचे वाले बाएँ हाथ में पद्म [कमल]), अपने नीचे वाले दाहिने हाथ में गदा (कौमोदकी) ,ऊपर वाले बाएँ हाथ में शंख (पाञ्चजन्य) और अपने ऊपर वाले दाहिने हाथ में चक्र(सुदर्शन) धारण करते हैं।
जय श्री हरि विष्णु🙏🙏