Dharmik Bahash

Dharmik Bahash This page is about the Spiritual Knowledge Given by Kavir Dev. This page is about the spiritual knowledge given by Kabir Dev.

26/03/2018

एक बार गुरु नानक देव जी से किसी ने पूछा कि गुरु के दर्शन करने से क्या लाभ होता है ?गुरु जी ने कहा कि इस रास्ते पर चला जा, जो भी सब से पहले मिले उस से पूछ लेना |वह व्यक्ति उस रास्ते पर गया तो उसे सब से पहले एक कौवा मिला, उसने कौवे से पूछा कि गुरु के दर्शन करने से क्या होता है ?उसके यह पूछते ही वह कौवा मर गया....वह व्यक्ति वापिस गुरु जी के पास आया और सब हाल बताया...अब गुरु ने कहा कि फलाने घर में एक गाय ने एक बछड़ा दिया है, उससे जाकर यह सवाल पूछो,वह आदमी वहां पहुंचा और बछड़े के आगे यही सवाल किया तो वह भी मर गया.....वह आदमी भागा भागा गुरु जी के पास आया और सब बताया...अब गुरु जी ने कहा कि फलाने घर में जा, वहां एक बच्चा पैदा हुआ है, उस से यही सवाल करना...वह आदमी बोला के वह बच्चा भी मर गया तो ?गुरु जी ने कहा कि तेरे सवाल का जवाब वही देगा...अब वह आदमी उस घर में गया और जब बच्चे के पास कोई ना था तो उसने पूछा कि गुरु के दर्शन करने से क्या लाभ होता है ?वह बच्चा बोला कि मैंने खुद तो नहीं किये लेकिन तू जब पहली बार गुरु जी के दर्शन करके मेरे पास आया तो मुझे कौवे की योनी से मुक्ति मिली और बछड़े का जन्म मिला....तू दूसरी बार गुरु के दर्शन करके मेरे पास आया तो मुझे बछड़े से इंसान का जन्म मिला....सो इतना बड़ा हो सकता है गुरु के दर्शन करने का फल, फिर चाहे वो दर्शन आंतरिक हो या बाहरी.....

ऐ सतगुरू मेरे...
नज़रों को कुछ ऐसी खुदाई दे...
जिधर देखूँ उधर तू ही दिखाई दे...
कर दे ऐसी कृपा आज इस दास पे कि...
जब भी बैठूँ सिमरन में...सतगुरू तू ही दिखाई दे..

जो मेरे पास है वो आपजीके पास नहीं 🙏 और जो आपजीके पास है (धन, दौलत, शौहरत)वो मुझे चाहिए नहीं | 🙏 मुझे ऐसा क्या मिला ? उत्...
26/03/2018

जो मेरे पास है वो आपजीके पास नहीं 🙏
और जो आपजीके पास है (धन, दौलत, शौहरत)वो मुझे चाहिए नहीं | 🙏
मुझे ऐसा क्या मिला ?
उत्तर->
1. मुझे वो मिला जिसके आगे हीरे की कोई किमत नही|
2. मुझे वो मिला जिसको पाने के लिए 88 हजार रीषी 18लाख ब्राह्मण 33करोड़ देवी देवते भी तरसते है|
3. मुझे वो मिला जो बृहमा जी , विशणु जी , और शिव जी को भी
नहीं मिला|
4. मुझे वो मिला जिसका कभी अंत नही|
5. मुझे वो मिला जिसकी तारीफ में सात समुंन्दृ जितनी स्याही और धरती को कागज धरू तो भी कम पड़े ।
सात समुन्द्रकी मसि करूं लेखनी करूं बनिराय
धरती का कागज करूं गुरु गुण लिखा न जाय
6. मुझे वो मिला जिसके लिए तीन लोक का राज भी मैं ठुकरा दूं।
i. मुझे वो अल्लाह मिला
ii. मुझे वो परमात्मा मिला
iii. मुझे वो इश्वर मिला
iv. मुझे वो गॉड मिला
v. मुझे वो साकार भगवान मिला
vi. जिसका नाम है #कबीर
vii. यही है वो परमात्मा जिसके लिए तड़पती है आत्मा
viii. इनके है यह लोक 🌇🏞सारे हम है इनके बच्चे प्यारे
समझ🙏🏻 लो जगत वाले सारे यही है असली पिता हमारे ।✅

A.यही है वो कुरान शरीफ🇵🇰📗 के अल्लाह जिसके बारे में पुकारे🕌 मुल्लाह

B.यही है गीता 📚🕉जी का सकेंत पूरण ब्रम्ह परमात्मा एक ।

C.बाईबल ✝📚ने है हमें बताया सृषटी को इन्होने रचाया ।

D.D.वेदों 📚में परमाण है #कबीर जी भगवान हैं।
यही है वो परमात्मा एक✅❣ जिसको पाने के लिए बंटे धरम अनेक ।
मुझे तो यह मिल गए परमात्मा इनको पाने के लिए कब पुकार करेगी आपजीकी आत्मा
धन , दौलत ,💸 🏘🏦शरीर यहीं रह जाऐंगे सत्गुरू वचन ही साथ जाऐंगे ।
तुने उस दरगाह का महल नी देखिया 👀जहाँ तिल तिल का लेखा ।
वो तत्वदरशी संत इस धरती🌍 पर अवतार ले चुका है जो हमें शास्त्रोंके अनुसार भक्ति करवाकर पूरण मोक्ष दिलाऐगा।और उस एक परमात्मा से मिलाएगा।
मानुष जनम दुर्लभ हैं मिले ना बारम्बार जैसे तरुवर से पत्ता टूट गिरे बहुर न लगता दार

एक बार संत रैदास (रविदास) जी चितौड़ पधारे थे। रैदासजी रघु चमार के यहाँ जन्में थे। उनकी छोटी जाति थी और उस समय जात-पाँत क...
26/03/2018

एक बार संत रैदास (रविदास) जी चितौड़ पधारे थे। रैदासजी रघु चमार के यहाँ जन्में थे। उनकी छोटी जाति थी और उस समय जात-पाँत का बड़ा बोल बाला था। वे नगर से दूर चमारों की बस्ती में रहते थे। राजरानी मीरा को पता चला कि संत रैदासजी महाराज पधारे हैं लेकिन राजरानी के वेश में वहाँ कैसे जायें? मीरा एक मोची महिला का वेश बनाकर चुपचाप रैदासजी के पास चली जाती, उनका सत्संग सुनती, उनके कीर्तन और ध्यान में मग्न हो जाती। ऐसा करते-करते मीरा का सत्त्वगुण दृढ़ हुआ। मीरा ने सोचाः ‘ईश्वर के रास्ते जायें और चोरी छिपे जायें? आखिर कब तक? फिर मीरा अपने ही वेश में उन चमारों की बस्ती में जाने लगी। मीरा को उन चमारों की बस्ती में जाते देखकर अड़ोस-पड़ोस में कानाफूसी होने लगी। पूरे मेवाड़ में कुहराम मच गया कि ‘ऊँची जाति की, ऊँचे कुल की, राजघराने की मीरा नीची जाति के चमारों की बस्ती में जाकर साधुओं के यहाँ बैठती है, मीरा ऐसी है…. वैसी है ननद उदा ने उसे बहुत समझायाः “भाभी ! लोग क्या बोलेंगे? तुम राजकुल की रानी और गंदी बस्ती में, चमारों की बस्ती में जाती हो? चमड़े का काम करनेवाले चमार जाति के एक व्यक्ति को गुरु मानती हो? उसको मत्था टेकती हो? उसके हाथ से प्रसाद लेती हो? उसको एकटक देखते-देखते आँखें बंद करके न जाने क्या-क्या सोचती और करती हो? यह ठीक नहीं है। भाभी ! तुम सुधर जाओ।” सासु नाराज, ससुर नाराज, देवर नाराज, ननद नाराज, कुटुंबीजन नाराउदा ने कहाः मीरा मान लीजियो म्हारी, तने सखियाँ बरजे सारी। राणा बरजे, राणी बरजे, बरजे सपरिवारी। साधन के संग बैठ, बैठ के लाज गँवायी सारी।।*

*‘मीरा ! अब तो मान जा। तुझे मैं समझा रही हूँ, सखियाँ समझा रही हैं, राणा भी कह रहा है, रानी भी कह रही है, सारा परिवार कह रहा है…. फिर भी तू क्यों नहीं समझती है? इन संतों के साथ बैठ-बैठकर तू कुल की सारी लाज गँवा रही है।’*

*नित प्रति उठ नीच घर जाय कुलको कलंक लगावे। मीरा मान लीजियो म्हारी तने बरजे सखियाँ सारी।।*

*तब मीरा ने उत्तर दियाः तारयो पियर सासरियो तारयो माह्म मौसाली सारी। मीरा ने अब सदगुरु मिलिया चरणकमल बलिहारी।।*

*‘मैं संतों के पास गयी तो मैंने पीहर का कुल तारा, ससुराल का कुल तारा, मौसाल का और ननिहाल का कुल भी तारा है।’ मूर्ख लोग समझते हैं कि भजन करने से इज्जत चली जाती है वास्तव में ऐसा नहीं है।*

*राम नाम के शारणे सब यश दीन्हो खोय।*
*मूरख जाने घटि गयो दिन दिन दूनो होय।।*

*मीरा की कितनी बदनामी की गयी, मीरा के लिए कितने षड्यंत्र किये गये लेकिन मीरा अडिग रही तो मीरा का यश बढ़ता गया। आज भी लोग बड़े प्रेम से मीरा को याद करते हैं, उनके भजनों को गाकर अथवा सुनकर अपना हृदय पावन करते हैं।*

*"पायो जी मैं राम रत्न धन पायो"*

सत साहेबजी !!🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

28/02/2017

झूठे सुख को सुख कहे, मानत है मन मोद.
खलक चबैना काल का, कुछ मुंह में कुछ गोद.
कबीर कहते हैं कि अरे जीव ! तू झूठे सुख को सुख कहता है और मन में प्रसन्न होता है? देख यह सारा संसार मृत्यु के लिए उस भोजन के समान है, जो कुछ तो उसके मुंह में है और कुछ गोद में खाने के लिए रखा है.

28/02/2017

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