Sade Guruji Dugri wale

Sade Guruji Dugri wale I believe in Guruji and he can manage everything here. Jai Guruji

23/04/2025

"मुस्कुराहट"एक कमाल की “पहेली” है जितना बताती है उससे कहीं ज्यादा छुपाती हैं"ज़िन्दगी"बड़ी "उलझी"हुई होती है इसके जवाब ढूढ़ने पर जीवन व्यर्थ मत करो क्यूंकि जब तुम जवाब ढूंढोगे तो ज़िन्दगी सवाल बदल देगी हमारी सोच हमारे विचारों को निर्देशित करती है हमारे विचार ही हमारे दृष्टिकोण का निर्धारित करते है और हमारा दृष्टिकोण हमारी जीवन शैली का वर्णन करता है,हर दिन की शुरुआत अच्छी सोच के साथ करने का प्रयत्न करें "बूंद" सा जीवन है इंसान का लेकिन अहंकार सागर से भी बड़ा है ना"बादशाह" चलता है ना "इक्का"चलता है ये खेल है अपने अपने"कर्मों"का यहाँ केवल "कर्मों" का "सिक्का" चलता है*

: *जहाँ हमारा स्वार्थ समाप्त होता है .
वही से हमारी इंसानियत आरम्भ होती है !!
लोग कहते है कि आदमी को अमीर होना चाहिए..
और गांव के बुज़ुर्ग़ो का कहना है कि आदमी का जमीर होना चाहिए...।।

🙏 JAI GURU JI 🙏
"मुस्कुराहट"एक कमाल की “पहेली” है जितना बताती है उससे कहीं ज्यादा छुपाती हैं"ज़िन्दगी"बड़ी "उलझी"हुई होती है इसके जवाब ढूढ़ने पर जीवन व्यर्थ मत करो क्यूंकि जब तुम जवाब ढूंढोगे तो ज़िन्दगी सवाल बदल देगी हमारी सोच हमारे विचारों को निर्देशित करती है हमारे विचार ही हमारे दृष्टिकोण का निर्धारित करते है और हमारा दृष्टिकोण हमारी जीवन शैली का वर्णन करता है,हर दिन की शुरुआत अच्छी सोच के साथ करने का प्रयत्न करें "बूंद" सा जीवन है इंसान का लेकिन अहंकार सागर से भी बड़ा है ना"बादशाह" चलता है ना "इक्का"चलता है ये खेल है अपने अपने"कर्मों"का यहाँ केवल "कर्मों" का "सिक्का" चलता है*

: *जहाँ हमारा स्वार्थ समाप्त होता है .
वही से हमारी इंसानियत आरम्भ होती है !!
लोग कहते है कि आदमी को अमीर होना चाहिए..
और गांव के बुज़ुर्ग़ो का कहना है कि आदमी का जमीर होना चाहिए...।।

🙏 JAI GURU JI 🙏

https://youtu.be/CM7I1LBQnLI?si=eiMb_GxnD4fD35M_
23/10/2024

https://youtu.be/CM7I1LBQnLI?si=eiMb_GxnD4fD35M_

शिव महापुराण Shiv Mahapuran अध्याय 151 | Sankshipt Shiv Puran | Hindi Audio -Series Bhakti Sagar Sankshipt Shiv Puran | अध्‍याय 151 | Hindi AudioPlease...

23/10/2024

*दुःख और सुख*

*पाप से मन को बचाये रहना और उसे पुण्य में प्रवृत्त रखना यही मानव जीवन का सबसे बड़ा पुरुषार्थ है।*

एक बहुत अमीर सेठ थे। एक दिन वे बैठे थे कि भागती-भागती नौकरानी उनके पास आई और कहने लगीः
"सेठ जी! वह नौ लाख रूपये वाला हार गुम हो गया।"

सेठ जी बोलेः *"अच्छा हुआ..... भला हुआ।"* उस समय सेठ जी के पास उनका रिश्तेदार बैठा था। उसने सोचाः बड़ा बेपरवाह है! आधा घंटा बीता होगा कि नौकरानी फिर आईः "सेठ जी! सेठ जी! वह हार मिल गया।" सेठ जी कहते हैं- "अच्छा हुआ.... भला हुआ।"

वह रिश्तेदार प्रश्न करता हैः "सेठजी! जब नौ लाख का हार चला गया तब भी आपने कहा कि 'अच्छा हुआ.... भला हुआ' और जब मिल गया तब भी आप कह रहे हैं 'अच्छा हुआ.... भला हुआ।' ऐसा क्यों?"

सेठ जीः "एक तो हार चला गया और ऊपर से क्या अपनी शांति भी चली जानी चाहिए? नहीं। जो हुआ अच्छा हुआ, भला हुआ।

*एक दिन सब कुछ तो छोड़ना पड़ेगा इसलिए अभी से थोड़ा-थोड़ा छूट रहा है तो आखिर में आसानी रहेगी।"*

अंत समय में एकदम में छोड़ना पड़ेगा तो बड़ी मुसीबत होगी इसलिए दान-पुण्य करो ताकि छोड़ने की आदत पड़े तो मरने के बाद इन चीजों का आकर्षण न रहे और भगवान की प्रीति मिल जाय।

*दान से अनेकों लाभ होते हैं। धन तो शुद्ध होता ही है। पुण्यवृद्धि भी होती है और छोड़ने की भी आदत बन जाती है। छोड़ते-छोड़ते ऐसी आदत हो जाती है कि एक दिन जब सब कुछ छोड़ना है तो उसमें अधिक परेशानी न हो ऐसा ज्ञान मिल जाता है जो दुःखों से रक्षा करता है।*

रिश्तेदार फिर पूछता हैः "लेकिन जब हार मिल गया तब आपने 'अच्छा हुआ.... भला हुआ' क्यों कहा?"

सेठ जीः "नौकरानी खुश थी, सेठानी खुश थी, उसकी सहेलियाँ खुश थीं, इतने सारे लोग खुश हो रहे थे तो अच्छा है,..... भला है..... मैं क्यों दुःखी होऊँ? वस्तुएँ आ जाएँ या चली जाएँ लेकिन मैं अपने दिल को क्यों दुःखी करूँ ? मैं तो यह जानता हूँ कि जो भी होता है अच्छे के लिए, भले के लिए होता है।

*जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा अच्छा ही है। होगा जो अच्छा ही होगा, यह नियम सच्चा ही है। मेरे पास मेरे सदगुरू का ऐसा ज्ञान है, इसलिए मैं बाहर का सेठ नहीं, हृदय का भी सेठ हूँ।"*

हृदय का सेठ वह आदमी माना जाता है, जो दुःख न दुःखी न हो तथा सुख में अहंकारी और लम्पट न हो। मौत आ जाए तब भी उसको अनुभव होता है कि मेरी मृत्यु नहीं। जो मरता है वह मैं नहीं और जो मैं हूँ उसकी कभी मौत नहीं होती।

*जीवन का उद्देश्य क्या है!*

मान-अपमान आ जाए तो भी वह समझता है कि ये आने जाने वाली चीजें हैं, माया की हैं, दिखावटी हैं, अस्थाई हैं। स्थाई तो केवल परमात्मा है, जो एकमात्र सत्य है, और वही मेरा आत्मा है। जिसकी समझ ऐसी है वह बड़ा सेठ है, महात्मा है, योगी है। वही बड़ा बुद्धिमान है क्योंकि उसमें ज्ञान का दीपक जगमगा रहा है।

संसार में जितने भी दुःख और जितनी परेशानियाँ हैं उन सबके मूल में बेवकूफी भरी हुई है। सत्संग से वह बेवकूफी कटती एवं हटती जाती है। एक दिन वह आदमी पूरा ज्ञानी हो जाता है। अर्जुन को जब पूर्ण ज्ञान मिला तब ही वह पूर्ण संतुष्ट हुआ। अपने जीवन में भी वही लक्ष्य होना चाहिए।

*🙏 JAI GURU JI 🙏*

*GURUJI SATSANG**23 OCTOBER 2024*🌹JAI GURU JI🌹🌹SHUKRANA GURU JI 🌹👇👇👇👇 https://youtu.be/hb4d-GP65kU?si=rc-Y3xLFnr4zEX3T*स...
23/10/2024

*GURUJI SATSANG*
*23 OCTOBER 2024*

🌹JAI GURU JI🌹
🌹SHUKRANA GURU JI 🌹

👇👇👇👇
https://youtu.be/hb4d-GP65kU?si=rc-Y3xLFnr4zEX3T

*सभी संगत से REQUEST🙏🙏है कि सत्संग को 🎧🎧 लगा कर सुने !*

*संगत जी अगर वीडियो पसन्द आए तो वीडियो को LIKE करे, COMMENT करे, SHARE करे और चैनल को SUBSCRIBE भी जरूर कर दे !*

https://youtube.com/?si=hmndKNLSypvkI56R

*JAI GURU JI 🙏🙏*

GURU JI SATSANG PLAYLIST || GURU JI AMRITVELA || 23 OCTOBER 24 WEDNESDAY ...

03/05/2024

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23/04/2024

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