08/27/2026
शादी के बाद शुरू हुई मोहब्बत
शादी को अभी सिर्फ़ तीन महीने हुए थे। सुहानी और आरव एक-दूसरे के साथ रहने तो लगे थे, लेकिन दोनों के बीच अभी भी एक अनजान-सी झिझक थी। शादी परिवारों की पसंद से हुई थी, इसलिए मोहब्बत का रिश्ता धीरे-धीरे बन रहा था।
एक शाम सुहानी तैयार होकर कमरे से बाहर आई। आरव ने उसे देखा, लेकिन हमेशा की तरह कुछ कहने के बजाय मुस्कुराकर चुप हो गया।
सुहानी ने पूछा, “क्या हुआ? ऐसे क्यों देख रहे हो?”
आरव ने कहा, “कुछ नहीं… बस सोच रहा हूँ कि जिस लड़की को शादी के दिन पहली बार ठीक से देखा था, आज वही मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गई है।”
सुहानी के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
उस रात दोनों देर तक बातें करते रहे—बचपन की यादें, अधूरे सपने और भविष्य की छोटी-छोटी इच्छाएँ। उस दिन उन्हें महसूस हुआ कि शादी ने उन्हें सिर्फ़ पति-पत्नी नहीं बनाया था, बल्कि एक-दूसरे का सबसे अच्छा दोस्त भी बना दिया था।
कुछ महीनों बाद आरव को काम के सिलसिले में दूसरे शहर जाना पड़ा। जाने से पहले उसने सुहानी से कहा, “मैं जल्दी लौटूँगा।”
सुहानी ने मुस्कुराकर कहा, “इस बार जल्दी आना… तुम्हारे बिना घर बहुत खाली लगता है।”
आरव के जाने के बाद पहली बार दोनों को समझ आया कि प्यार हमेशा पहली नज़र में नहीं होता। कभी-कभी साथ रहते-रहते, एक-दूसरे की परवाह करते-करते और छोटी-छोटी खुशियाँ बाँटते-बाँटते प्यार जन्म लेता है।
दो महीने बाद आरव अचानक घर लौटा। दरवाज़ा खुलते ही सुहानी उसे देखकर कुछ पल के लिए चुप रह गई।
आरव ने मुस्कुराकर कहा, “कहा था ना… जल्दी लौटूँगा।”
सुहानी की आँखों में खुशी थी। उसने बस इतना कहा—
“अब समझ आया… शादी प्यार की मंज़िल नहीं होती, कभी-कभी वहीं से सच्ची मोहब्बत की शुरुआत होती है।”
और उस दिन से उनकी शादी सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं रही—वह दो दिलों की ऐसी कहानी बन गई, जिसमें प्यार हर दिन थोड़ा और गहरा होता गया।