Jasmin Ortiz

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05/14/2026

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04/17/2026

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प्रिय पाठको, अपनी कहानी में मैं अपनी सगी भाभी की सच्ची दास्ताँ सुना रहा हूँ !आप सबको सबसे पहले मैं अपना परिचय देना चाहता...
04/05/2026

प्रिय पाठको, अपनी कहानी में मैं अपनी सगी भाभी की सच्ची दास्ताँ सुना रहा हूँ !आप सबको सबसे पहले मैं अपना परिचय देना चाहता हूँ।मेरा नाम विजय अग्रवाल है और मैं हैदराबाद (आंध्र प्रदेश) के एक गाँव में रहता हूँ, मेरी अभी तक शादी नहीं हुई है। मुझे इस बात का पक्का यक़ीन है जिसे भी मैंने किया है वो पूरी तरह सन्तुष्ट हुई है।मेरी इस कहानी की नायिका की बात करता हूँ।जिन भाभी की ठुकाई मैंने की है, उनकी उम्र 24 साल की है वो काफ़ी कामुक और आकर्षक माल हैं।उनका नाम सरिता है, इतनी ख़ूबसूरत हैं कि जो भी एक बार उन्हें देख ले.. तो बस उनका दीवाना हो जाए।उनका 36-26-36 का फ़िगर बहुत ही मस्त है।मेरे भैया की नई-नई शादी हुई थी।

भाभी को जब मैंने पहली बार देखा, तब से ही मैं ये सोचने लगा थी कि मैं उन भाभी की ठुकाई एक बार ज़रूर तो जरूर करूँगा और उनके नाम से मारा करता था।
शादी के कुछ दिनों बाद ही भैया को ऑफिस के काम से एक महीने के लिए अमेरिका जाना पड़ा।
तब भैया ने भाभी से कहा- तू क्यों परेशान होती है.. तेरी सभी ज़रूरतों को तेरा यह देवर पूरा करेगा।
काश उस वक्त वो समझे होते कि सभी ज़रूरतों को मैं पूरा कर दूँगा यानि कि भैया ने सोचा ही नहीं था कि मैं उनकी बीवी को करूंगा ।
बस वो दिन आया और भैया चले गए अमेरिका।
अभी 4-5 दिन ही बीते थे कि भाभी को बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
मैं तो उन्हें करने का बहुत दिनों से प्लान बना रहा था।
एक दिन मैं अपने कमरे में सोया हुआ था कि भाभी मुझे उठाने के लिए आईं।
मैं सिर्फ़ अपने अंडरवियर में था।
जब भाभी मुझे उठाने के लिए आईं तब उनकी नज़र मेरे तने हुए सामान पर पड़ी।
मैं भी जानबूझ कर वैसा ही पड़ा रहा।
ख़ैर भाभी ने देखा और शरमा कर चली गईं।
अगले दिन भी यही हुआ।
अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
इसके अगले दिन जब भाभी मुझे उठाने के लिए आईं तब मैंने उन्हें मेरे पास खींच लिया और उनके होंठों पर एक चुम्बन जड़ दिया।
भाभी भी 8-10 दिनों से भूखी थीं।
उन्होंने भी सहयोग किया।
फिर मैंने धीरे-धीरे उनके चेहरे पर से जाते हुए उनकी गर्दन पर चुम्बन करना शुरू किया।
भाभी और गरम होती गईं।
मैंने धीरे-धीरे उनके गोलाइयों को दबाया और उनका ब्लाउज उतार दिया।
फिर उनकी साड़ी खोल दी।
अब भाभी सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में रह गई थीं।
मैं उनके होंठों पर चुम्बन किए जा रहा था और उनके संतरो को दबा रहा था।
फिर मैंने उनकी ब्रा भी खोल दी।
अब उनके बड़े-बड़े उभार मेरे सामने सर उठाए खड़े थे।
मैं पागल हुए जा रहा था।
उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और चूसने लगी और मेरा सहलाने लगीं।
मुझे लगा मैं सपना देख रहा हूँ।
उसने मेरे कपड़े उतारे।
मैं भी नंगा हो गया फिर उसने मेरा सामान अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया।
इससे पहले किसी औरत ने मेरा नहीं चूसा था।

मैंने सिसकारी भरते हुए कहा- भाभी… मजा आ रहा है!
फिर वह मुझे करने के लिए कहने लगी और मेरे नीचे लेट गई।
अब मेरी भाभी की ठुकाई का वक्त आ गया था।
मैंने भाभी की गुफा पर सामान रख कर धक्का मारा।
उनकी गुफा बहुत ज़्यादा ठुकि हुई थी, मेरा एक बार में पूरा खा गई।

उन्होंने कहा- आह.. मज़ा आ गया.. और ज़ोर से पेलो ..
मैं अपना पूरा बाहर निकालता और एकदम से डाल देता।
वो भी नीचे से धक्के मार रही थी और कह रही थी- हाय…मेरे..विज्जू.. ज़ोर से .. मज़ा आ रहा है..
धकापेल धकापेल भाभी की ठुकाई होने लगी।
फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों झड़ गए उसने मुझे कमर से पकड़ लिया और कहा- मेरे ऊपर ही लेटे रहो।
फिर क़रीब 30 मिनट तक हम मस्ती करते रहे, फिर उसने मेरा सामान अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
मैं उसकी गुफा में ऊँगली डाल कर उसे मज़ा दे रहा था।
कुछ ही पलों के बाद मैं फिर से तैयार हो गया था।
अब की बार उसने मुझसे कहा- मुझे पीछे से ठुकना अच्छा लगता है… तुम मुझे पीछे से करो ।
मैंने उसके हिप को फैला कर उसकी उठी हुई गुफा में अपना साढ़े सात इन्ची सामान फंसा कर भाभी की ठुकाई की, कुतिया की तरह से तरह से उन्हें किया ।

अबकी बार वो जल्दी झड़ गई, मेरा अभी भी मस्त था।
मैं उसे धकापेल कर रहा था।
मेरा पानी नहीं निकल रहा था।
वो तड़फ कर कह रही थी- बस विज्जू.. अब बस करो मेरी टाँगें दुख रही हैं।
मैंने कहा- थोड़ी देर.. और..मेरी जान।
मैं धक्के मार रहा था..
वो चिल्ला रही थी।
मैं पीछे से कुत्ते जैसा लग कर भाभी की ठुकाई किये जा रहा था और उनकी संतरे हवा में झूल रही थीं।

मैंने अपने हाथों में उसकी संतरो को पकड़ कर खूब मसला।
उसके संतरो को भी मैं खूब दबा रहा था।
भाभी के मुँह से मादक मस्ती की सिसकारियाँ निकल रही थीं।
खूब मजा आ रहा है.’
तभी मेरे सामान ने उसकी गुफा की गर्मी से उन पर जुल्म कर दिया और मैं तेजी पेलने लगा..
तभी उनका पानी निकल गया।
पानी से लबालब गुफा से ‘फ़च-फ़च’ की आवाज़ आ रही थी।
मैं उसे लगातार बेरहमी से ठुकाई करता रहा…
वो कह रही थी- बस मैं मर जाऊँगी..
फिर मेरा पानी उसकी गुफा में निकल गया।
ठुकाई से थक कर हम दोनों लेट गए।
उन्होंने कहा- तुमने मेरी गुफा का भुरता बना दिया, तुम्हारे भाई ने आज तक कभी ऐसा नहीं पेला ।
फिर मैं रोज़ भाभी की ठुकाई करने लगा।

कहानी मैं खुद सूना रही हूँ, बदचलन ही खुद को ही कह रही हूँ। ये आपको तय करना है मैं बदचलन हूँ या सही हूँ। अगर मैं रात की प...
04/05/2026

कहानी मैं खुद सूना रही हूँ, बदचलन ही खुद को ही कह रही हूँ। ये आपको तय करना है मैं बदचलन हूँ या सही हूँ। अगर मैं रात की पड़ोस के लड़के से करवाते पकड़ी गई तो किसका दोष है। मेरा दोष है या हरामी पति का या दोगला ससुर का है। आप खुद तय करना। मैं तो एक एक बात आपको यहाँ पर बताउंगी क्या हुआ था उस रात। उस लड़के को मैंने पेलने के लिए कैसे बुलाया और फिर पकड़ी गई तो मुझे बाप बेटे ने मिलकर रात भर क्यों पेला और क्या क्या हुआ। सब आपको बताउंगी।

1 दिन की बात है मेरे पति और मेरे ससुर दोनों भटिंडा गए हुए थे मैं दिल्ली में रहती हूं भटिंडा इसलिए क्योंकि उन्हें कुछ जमीन जायदाद का काम था तो जाना जरूरी हो गया। मेरे घर में मेरे अलावा और कोई नहीं है क्योंकि मेरे पति एकलौता का संतान है सास भी नहीं है। तुम्हें ही घर में एक औरत हूं जो घर को संभालते हो। पर क्या बताऊं दोस्तों अपनी व्यथा में किसको सुनाऊं जब से शादी हुई तब से मेरा पति मुझे कुछ नहीं कर पाता है मेरा पति मुझे पेल नहीं पाता है वह कुछ नहीं कर पाता मुझे।

आप खुद बताइए ठुकाई की भूख होती है और अगर भूख शांत नहीं होगा तो क्या करेगा वह इंसान तो इधर उधर मुंह मारे गए चाहे आदमी हो या औरत ठुकाई तो चाहिए ही होता है जिंदगी में पर यह ऐसी चीज होती है कि लोग किसी को कह भी नहीं सकता। इसलिए मेरा मन इधर उधर भटकने लगा मैं ढूंढने लगे किसी ऐसे इंसान को जो मुझे खुश कर सके

मेरे पड़ोस में ही एक लड़का रहता है वो काफी हैंडसम है जिम जाता है स्टाइल मारता है और हैप्पी अच्छा तो मैं उसकी तरफ आकर्षित होने लगी और उसको कब्जे में भी ले ली। उसके साथ रिलेशन तो दो बार से बना था इसके पहले पर हां रोजाना मैं उससे चाहे तो जरूर करती थी व्हाट्सएप पर तो हम दोनों में काफी बातें खुल चुकी थी हम दोनों ने एक दूसरे को अपने अपने पिक्चर भी शेयर की थी मैं उनको कई सारे नंगी तस्वीरें भेजी थी।

जब मैं नहाने जाती थी तभी वह भी नहाने जाता था और तभी मैं आपको वीडियो कॉल करते थे वह मेरे पूरे शरीर को देख सकता था मैं उसके पूरे शरीर को देख सकते थे उसका खड़ा होता था तो मुझे बहुत अच्छा लगता था और मेरी संतरे बड़ी बड़ी जब वह देखता था तो आह आह करता था। यह सब बहुत अच्छा लग रहा था यह सब सिलसिला चल ही रहा था पर दोस्तों एक दिन मैं चाहते थे कि डर के नहीं खुलकर उसे करवाऊं।

प्लान बन गया कि मुझे पहले से ही पता था मेरे पति और ससुर दोनों जाने वाले हैं तो मैं आपको पहले ही बता दी। पर वह किसी काम से बाहर चला गया था तो बात बन नहीं पाई। शाम को दूसरे तीसरे दिन फोन आया उस लड़के का आज मैं फ्री हूं तुम्हारे ससुर और पति घर पर है क्या तुम्हें बोल दे वह लोग बस से आ रहे हैं सुबह तक वह पहुंच जाएंगे. क्योंकि वहां से चल चुके हैं फोन आया था उनका।
तो मैं उसको टाइम दे दूं कि ठीक है तुम रात को 9 बजे आ जाना। क्योंकि मुझे पता था मेरे ससुर और मेरा पति दोनों सुबह तक पहुंचेगा दिल्ली तो डर नहीं था मुझे तो मैं आपको 9का टाइम दे दी और वह 9 बजे आ भी गया.

जब अंदर आया तो मैं दरवाजा बंद कर दे और हम दोनों एक दूसरे के गले में झूमने लगे किस करने लगे वह मेरी संतरे दबाता मैं उसका पकड़ता ऐसा ही चलता रहा। जल्दबाजी नहीं करना चाहते थे क्योंकि टाइम था इसलिए मैं सोचा कि पहले अपने जिस्म को खूब हूं छिड़वाऊं ताकि। गरम हो जाओ उसके बाद आराम से कर सकूं ताकि मैं भी खुश हो जाऊं जाने कि मैं भी संतुष्ट हो जाऊं और को भी संतुष्टि मिले इस वजह से हम दोनों एक दूसरे को तुम रहे थे डांस कर रहे थे नंगे नाच रहे थे।

धीरे-धीरे हम दोनों के वासना जाग उठे और हम दोनों एक दूसरे के जिसमें को मुंह से छूने लगे चाटने लगे। मैं गर्म हो चुकी थी वह भी काफी गर्म हो चुका था उसका मोटा हो चुका था खड़ा हो गया था मेरी गुका पर काफी गीली हो गई थी अब बर्दाश्त के बाहर हो गया था।
उसने मुझे कहा कि अब ले लो नहीं तो मेरा निकल जाएगा। क्योंकि मैं घंटे से चूस रही थी वह मित्रों को दबा रहा था मेरी हिप में उंगली कर रहा था मेरी गुफा में उंगली कर रहा था तो दोस्तों आप खुद सोचिए कौन सा ऐसा मर्द होगा इतना सहेगा।
मुझे भी अब अपनी गुफा में चाहिए था तो मैं उसको बेडरूम में दे गई नीचे लेट गई पहले उसने फिर से गुफा चाटा और फिर अपना निकाल कर के मेरी गुफा के ऊपर सेट किया और फिर पेल दिया जोर-जोर से। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि मोटा मिल रहा था मुझे तो मुझे बहुत सुकून मिला था ऐसा लग रहा था मैं स्वर्ग में हूं मुझे लगाता था तुम्हें तो जिस्म मैं बिजली दौड़ जाती थी। मैं काफी ज्यादा काम हो गई थी हिप उठा रही थी। हिप उठा उठा कर दी थी रात करीब 10:30 बज गए थे।

तभी मेरे घर का बेल बजा, मैं हैरान थी इतनी रात को कौन आएगा मुझे पता था मेरे पति और ससुर आने वाले थे क्योंकि वह बस से आ रहे थे। मुझे लगा कोई होगा तो गेट के बाहर से ही चला जाएगा तो मैं बस नाइटी ऊपर डाल दी अंदर कुछ भी नहीं पहने और फिर दरवाजे के पास गई दरवाजा जैसे खुली तो मैं दंग रह गई दोनों बाहर खड़े थे। मैं बोली आप लोग और इस समय तो बाहर सही बोले हां हां खुला दरवाजा जल्दी आ गया बस से नहीं आया. क्योंकि यमुना बाजार वाले अपनी कार से आ रहे थे तो वह अकेले थे तो हम दोनों भी होने के साथ आ गए इसलिए हम लोग जल्दी पहुंच गए। और वहां से भी 2 घंटा पहले निकल पड़े थे।

मेरे पैरों के नीचे जमीन खिसक गई थी तभी वह लड़का भी कमरे से उठकर गेट के पास आ गया। दरवाजा मैं कहां पर हूं खुली वह लड़का तुरंत बाहर निकल गया और चला गया मेरे ससुर और मेरे पति को सारा माजरा समझ आ गया था क्योंकि मेरी ब्रा और पेंटी वहीं पर थे फर्श पर गिरे हुए। और सेफ्टी का पैकेट टेबल पर पड़ा था मैं तुम्हारा दोस्त हूं बुधवार को सबसे पहले मेरी ब्रा और पेंटी को देखा फिर पैकेट को दिखा।

फिर क्या था उन्होंने दोनों ने मुझे गालियां देना शुरु कर दिया बदचलन बोलना शुरु कर दिया। मारने वाले थे वैसे मैंने बोल दे कि यह सब क्यों कर रहे हो क्योंकि तुम पेल नहीं पाते हो मुझे तुम मुझे खुश नहीं कर पाते हो। यह करना पड़ा जब मुझे भूख है और तुम मुझे इस को पूरा नहीं कर रहे हो तो मैं क्या करूंगी। इतना सुनते ही वह दोनों और भी ज्यादा आग बबूला हो गए और गीत को बंद किया और दोनों मिलकर मुझे पकड़कर बेडरूम में लेकर आए और दोनों ने अपने अपने कपड़े खोलें और बोले आज इसकी गर्मी को को हम खत्म कर देते है ।

आज मैं इसकी हिप फाड़ देता हूं आज मैं उसकी गुफा फाड़ देता हूं और दोनों मिलकर मुझे पेलने लगे। दोस्तों जैसा हो तो ना पेल रहे थे मुझे ऐसे ही ठुकाई चाहिए थी। मैं खुश थे मैं नाराज नहीं थी पर अब तूने गुस्से में थे मैं उनसे का खूब मजे लिए तूने मुझे उलट-पुलट कर पेल रहे थे और मैं इसका मजे ले रहे थी। भांड में जाए रिश्ते भाड़ में जाए नाते। ससुर हो या कोई और मुझे आज ठुकना था तो ठुकना था। सच पूछिए तो वह लोग जैसा बोल रहे थे कि आज तेरी गर्मी को खत्म करता हूं। और तेरी मारता हूं तेरा हिप मारता हूं तो सच में यह सपना मेरा था कि कोई ऐसा ही करें मेरी फाड़ दी मेरी हिप फाड़े पर मुझे खुश करे।

पूरी रात तो दोनों पेल नहीं पाए पर हम दोनों ने मिलकर मुझे कभी खुश कर दिया। जिंदगी में पहली बार में संतुष्ट हो पाए थे क्योंकि मेरे पति का भी मर्दानगी की ललकार हो गया था इसलिए अपने सामान को पहले जा रहा था, मेरी गुफा में और ससुर को बहुत दिनों से नहीं मिला था इसलिए उसका भी मनोकामना पूरा हो गया और सच पूछिए तो हम तीनों का मनोकामना पूरा हो गया हम तीनों भी यही चाहते थे।

मेरा पति चाहता था कि मैं उसको संतोष कर पाऊं मेरे ससुर को काफी दिन से नहीं मिला था और मुझे कभी ऐसा सामान नहीं मिला था और ऐसे किसी ने मुझे संतुष्ट नहीं किया था तो आज वह भी पूरा हो गया दोस्तों।
खूब मजे ले अब तो रोजाना ठुकती हूँ चाहे वह पति हो या ससुर हो। कभी कभी गलत काम भी सही हो हो जाता है जैसा मेरे साथ हुआ। अब मैं संतुष्ट हूँ। ठुकाई का मजा ले रही हूँ। वो दोनों भी खुश है मेरे से उन दोनों को कोई गीला शिकवा नहीं है। तीनो खुश खुशः रह रहे है।

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम फजल है और में हैदराबाद का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 26 साल है, दोस्तों आज में आप सभी को जो अपनी ...
04/04/2026

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम फजल है और में हैदराबाद का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 26 साल है, दोस्तों आज में आप सभी को जो अपनी कहानी सुनाने जा रहा हूँ और यह मेरी एक सच्ची घटना है। दोस्तों में जिस घर में किराए से रहता था उसमे गरिमा आंटी जो मेरी मकान मालकिन है वो भी रहती है और उनकी उम्र करीब 34 साल है और उनके फिगर का साईज़ 34-28-36 है और वो दिखने में बहुत ही सुंदर है और एक बहुत ही मस्त औरत है और में हमेशा उनको देखते ही रहता था क्योंकि मुझे उनके वो बड़े बड़े झूलते हुए संतरे बहुत ज्यादा पसंद थे और उसकी वजह से में उनकी तरफ बहुत ज्यादा आकर्षित था। में हमेशा उनके संतरो को दबाना चाहता था और उन्हें छूकर महसूस करना चाहता था।

एक दिन आंटी ने मेरे दरवाजे की घंटी को बजाया, लेकिन में उस समय सोया हुआ था तो में आंटी की आवाज सुनकर जल्दी उठा और मैंने जाकर दरवाजा खोल दिया। मैंने देखा कि बाहर दरवाजे पर आंटी खड़ी हुई थी और उस समय मेरा तनकर खड़ा हुआ था जिसको आंटी ने भी देख लिया। वो मुझे नाश्ता देने के लिए आई थी और फिर वो मुझे देकर चली गई। एक दिन ऐसे ही चला गया और दूसरे दिन में आंटी के पास चला गया तो आंटी उस समय लाल कलर की साड़ी पहने हुए हुए सोफे पर बैठी हुई थी और उनके बच्चे अपने स्कूल का काम कर रहे थे। में अंदर आकर कम आवाज करके टीवी देखने बैठ गया और फिर कुछ देर बाद आंटी मुझसे बोली कि तू बैठ में तेरे लिए चाय लेकर अभी आती हूँ। तो वो मुझसे इतना कहकर किचन में चली गई और कुछ देर में मेरे लिए चाय बनाकर ले आई और जब वो मुझे चाय देने के लिए झुकी तो अचानक से उसकी साड़ी का पल्लू नीचे सरक गया, वाह दोस्तों वो क्या नजारा था, वो संतरे मेरे सामने आने को बिल्कुल बैताब थे तो में उन्हें अपने सामने देखते ही एक टक नजर से देखता ही रह गया।

तभी आंटी ने मुझसे कहा कि क्यों ऐसे क्या घूर रहे हो? तो में एकदम से हड़बड़ा गया और उनके हाथ से चाय लेकर अपनी नज़र नीचे करके बैठ गया और चुपचाप चाय पीने लगा। फिर में कुछ देर बाद वापस बाहर आकर सिगरेट पीने के लिए बाहर निकल गया और बस उनके बारे में सोचने लगा और उनके संतरो को अपनी आखों के सामने देखने लगा। रात को 11 बजे मेरे दरवाजे की घंटी बजी, लेकिन उस समय तक भी में सुबह वाली उस घटना के बारे में सोच रहा था और अब भी मेरा थोड़ा थोड़ा सा खड़ा हुआ था। फिर मैंने उठकर दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि बाहर आंटी पर्पल कलर की मेक्सी में ठीक मेरे सामने खड़ी हुई थी।

मैंने उनसे कहा कि हाँ आइए ना आंटी क्या चाहिए आपको? तो उन्होंने मुझसे थोड़ा ऊँची आवाज में पूछा कि तू सुबह ऐसे क्या देख रहा था? तो में उनके मुहं से यह बात सुनकर अचानक से डर गया और मैंने उनसे कहा कि सॉरी आंटी वो बस ऐसे ही मुझसे ग़लती से हो गया और में अब ऊपर से नीचे तक पूरी तरह पसीने से भीग चुका था। तो आंटी ने अब मुझसे बहुत नरम आवाज से कहा कि चलो कोई बात नहीं है तुम यहाँ पर बैठो। में उनके कहते ही तुरंत बैठ गया और अब आंटी मुझसे पूछने लगी कि क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है? तो मैंने कहा कि जी नहीं, दोस्तों में अचानक से बदले उनके इस स्वभाव से बहुत चकित था कि वो मुझसे अब यह सब क्या पूछ रही है? क्योंकि अब मैंने गौर किया था कि उनके चेहरे की बनावट और मुझसे बात करने का तरीका बिल्कुल बदल सा गया था और उनके चेहरे पर मुझे एक अजीब सी शरारती हंसी नजर आ रही थी।

फिर आंटी ने मेरी बात सुनकर कहा कि ठीक, लेकिन क्या तुमने कभी किसे से किया है? तो मैंने कहा कि नहीं, दोस्तों अब मुझे उनकी बातों से इस बात का अंदाजा हो गया कि वो मुझसे क्या पूछना या मेरे मन में क्या है वो जानना चाहती है? तभी उन्होंने मुझसे कहा कि तू क्या मेरे साथ करेगा? दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर में तो जैसे सातवें असमान में उड़ने लगा और बहुत खुश होकर मन ही मन सोचने लगा कि जैसे कि वो खुद ही मेरे पास आज आ गई है मुझसे अपनी करवाने के लिए और अब मैंने ज्यादा समय खराब ना करते हुए तुरंत ही आंटी को अपनी बाहों में जकड़कर किस करते हुए उनके संतरो को उनकी मेक्सी में से ही दबाना शुरू कर दिया क्योंकि अब में इतना अच्छा मौका बिल्कुल भी अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहता था। वाह मज़ा आ गया मुझे उनके वो मुलायम बड़े बड़े संतरे दबाकर।

फिर करीब पांच मिनट के बाद मैंने आंटी की मेक्सी को खोल दिया और अपने भी कपड़े उतार दिए। तो आंटी ने मुझसे पूछा कि क्या तुम्हारे पास कोई फिल्म की सीडी है?
फिर मैंने कहा कि मेरे पास ऐसी कोई भी सीडी नहीं है, लेकिन में वो सब ऑनलाईन ही देखता हूँ तो मैंने एक मस्त फिल्म नेट पर लगा दी और अब मैंने जैसे अपना सामान पेंट से बाहर निकाला तो आंटी देखती ही रह गई और मुझसे कहने लगी कि वाह तेरा तो इतना बड़ा और मोटा भी है, मुझे पता होता तो में पहले ही तुझसे करवा लेती, लेकिन अब में तुझसे हर रोज़ अपनी करवाया करूंगी क्योंकि मेरा पति तो बाहर है और वो दो साल में एक बार आता है और वो उसका काम होने के बाद ही मुझे ऐसे ही छोड़कर सो जाता है और फिर में अपनी उंगली से ही काम चलाती हूँ, लेकिन अब तू आ गया है तो मुझे मज़ा आ गया और फिर वो इतना कहकर मेरा चूसने लगी। वाह दोस्तों क्या मज़ा आ रहा था और अब में उसके मुहं में मेरा देकर में आसमान में उड़ रहा था। मुझे ऐसे महसूस हो रहा था और करीब दस मिनट चूसने के बाद में करीब 15 मिनट तक उसके संतरो को दबाता ही रहा।

तभी आंटी मुझसे कहने लगी कि प्लीज थोडा आहिस्ता आहिस्ता दबा मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
में : आंटी मुझे अब इनको चूसना और दबाना बहुत अच्छा लगता है, प्लीज आप मुझे आज कुछ भी मत कहो, में आज आपकी कोई बात नहीं सुनूंगा।
आंटी : प्लीज थोड़ा धीरे करो

अब आंटी ने मेरे सर को पकड़कर अपनी गुफा में दबाने लगी और में ना ना कहता रहा, लेकिन वो अब मुझसे अपनी गुफा को ज़बरदस्ती चटवाना चाह रही थी। अब वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है प्लीज फजल आज डाल दे तेरा सामान मेरी इस भूखी गुफा में। पिछले 15 महीने से नहीं ठुकि हूँ, प्लीज आज बुझा दे इसकी प्यास, अब से में तेरी ही पत्नी बनकर रहूंगी डाल। अब मैंने आंटी को सीधा लेटाकर उनकी कमर के नीचे एक तकिया रखकर मेरा सामान गुफा के मुहं पर रख दिया और फिर एक ज़ोर का धक्का देने के साथ ही सामान को गुफा के अंदर डालने लगा जिसकी वजह से आंटी बहुत ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगी और फिर उन्होंने मुझे गाली देते हुए कहा कि इतने ज़ोर से मत कर, अब इसे बाहर निकाल दे
में मर गई माँ बहुत दर्द हो रहा है बाहर निकाल इसे।

दोस्तों मैंने महसूस किया कि वो अब उस होने दर्द से कांप रही थी। में थोड़ा ऐसे ही रुका रहा और अब धीरे धीरे धक्का देने लगा, आंटी अब भी दर्द से करहा रही थी और सिसकियाँ लेकर मुझे गालियाँ देकर कह रही थी हाँ और ज़ोर से , इस भूखी पुजारन को, आज से में तेरी ही हूँ, पेल दे आज इसकी प्यास बुझा दे ज़ोर लगाकर दे। अब में ज़ोर ज़ोर से धक्के पे धक्के दे रहा था और आंटी भी बहुत मस्त पूरी तरह जोश में आकर मस्ती में मुझसे ठुकवा रही, वाह क्या मज़ा आ रहा था। फिर मैंने उनसे कहा कि आंटी तुमको करने का ख्याल बहुत दिनों से था, लेकिन आज में हक़ीक़त में तुम्हे कर दूंगा, यह मैंने कभी नहीं सोचा था और फिर बीस मिनट के बाद मैंने उनसे कहा कि आंटी में अब झड़ने वाला हूँ तो में अपना माल कहाँ पर निकालूं? तो आंटी ने मुझसे कहा कि तू मुझे आज तेरा पिला दे, मुझे आज उसे चखना है।

फिर मैंने तुरंत अपना सामान उसकी गुफा से बाहर निकालकर उसके मुहं में डालकर मुहं में झड़ गया और उस बीच में आंटी दो बार झड़ चुकी थी, वो कहने लगी कि वाह मज़ा आ आ गया। दोस्तों उस रात में उनके पास में लेट गया और थोड़ी देर बाद आंटी मेरे सामान को चूसने लगी। मैंने उनसे कहा कि आंटी अब हम कल करते है तो आंटी ने मुझसे कहा कि मुझे तेरे साथ और भी गेम खेलना है। फिर उन्होंने चूसते चूसते मेरे सामान को एकदम से खड़ा कर दिया और मेरा अब गरम सरीए की तरह खड़ा था और अब वो मेरे सामान पर बैठकर आहिस्ता आहिस्ता उछलने लगी और चीखते चिल्लाते हुए माँ मर गई कहती रही, जिसकी वजह से पूरे कमरे में अब आवाज़ गूंज रही थी और करीब दस मिनट बाद आंटी उछलते उछलते फजल कहते हुए झड़ गई और मेरे पास में लेट गई।

अब में उठाकर एक बार फिर से डालकर करने लगा क्योंकि में अभी भी नहीं झड़ा था और करीब दस मिनट तक में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर करता रहा। आंटी का क्या? वो तो बस पड़ी हुई फजल में मर गई हाँ करो मुझे और ज़ोर से कहती रही और इस बीच हम दोनों ही एक साथ झड़ गए। उस समय में आंटी की गुफा में ही झड़ गया और जब मैंने घड़ी में समय देखा तो उस वक्त सुबह के 2:45 बज गए थे। तो आंटी ने कहा कि हम कल फिर से करेंगे और फिर वो चली गई।

दोस्तों अब हमारा जब भी मन करे तो हम एक साथ पति पत्नी की तरह मस्ती करते है और में उनके साथ बहुत मज़े लेता हूँ, मैंने उनको दिन रात जब में बहुत बार किया और वो मुझसे करवाकर अपनी आग को शांत करती है।

मेरा नाम योगेश है. कद 5 फुट 8 इंच का है, रंग एकदम गोरा है और मैं इन्दौर शहर से हूँ. यह बात 3 साल पहले की है, उस समय मैं ...
04/04/2026

मेरा नाम योगेश है. कद 5 फुट 8 इंच का है, रंग एकदम गोरा है और मैं इन्दौर शहर से हूँ. यह बात 3 साल पहले की है, उस समय मैं कॉलेज के प्रथम वर्ष में था.

वैसे तो मैं सभी विषय में अच्छा था. बस इंग्लिश में लिखने में हजारों गलतियां करता था. मैं पंकज सर के पास इन्कम टैक्स पढ़ने के लिए ट्यूशन जाता था. उनका घर थोड़ी दूरी पर था. उनके घर पर उनकी पत्नी इंग्लिश पढ़ाया करती थीं. सर ने बहुत बार मुझसे इंग्लिश ट्यूशन चालू करने के लिए कहा था, लेकिन मैं किसी न किसी बहाने टाल देता था.

फिर एक दिन सर की पत्नी ट्यूशन में आयी थीं, शायद उन्हें सर से कुछ काम था. मैंने उन्हें तब पहली बार देखा था. वो इतनी खूबसूरत थीं मानो कोई अप्सरा हों. मेरा उन पर दिल आ गया था. फिर मैं खुद को कोसने लगा कि अब तक इंग्लिश की ट्यूशन शुरू क्यों नहीं की. मैं कितना बड़ा बेवकूफ था.
उस दिन रात भर सर की पत्नी को याद करता रहा. फिर मुझसे रहा नहीं गया, तो मैंने उनके नाम की मारी और सो गया.
मैंने 3 दिन बाद सर की वाइफ से इंग्लिश ट्यूशन लेना शुरू कर दी. जब मैं पहले दिन गया, तो वहां और भी स्टूडेंट थे.
मेम ने मेरा नाम पूछा.

मैंने उनका जवाब दिया, फिर मैंने उनसे, उनका नाम पूछना चाहा. अब तक मैं उनका नाम नहीं जानता था.
मैंने नर्वस हो कर कहा- मेम आपका नाम क्या है?
उन्होंने अपना नाम संगीता बताया. मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये सर की पत्नी ही हैं. उनकी उम्र 30 साल होगी लेकिन दिखने में वो 20-22 साल जैसी थीं. वो दिखने में एकदम गोरी थीं. उनके गुलाबी होंठ, सेब जैसे लाल गाल … मतलब मेम एकदम माल थीं.
करीब 2 महीने में हम दोनों आपस में घुल गए थे. मेम के साथ मेरा हंसी मजाक भी शुरू हो चुका था. मेम जब भी सामने होतीं, तो मेरा ध्यान उनके होंठ और संतरो पर ही ज्यादा जाता था. शायद ये बात मेम को पता चल गई थी कि मैं उनके संतरे देखता रहता हूं, इसलिये अब मेम का ज्यादा ध्यान मेरे तरफ ही रहता था और वो बार बार साड़ी का पल्लू संवारने लगती थीं.

मैं रोज यही सोचता रहता था कि बस एक बार मेम करने को मिल जाएं, तो मजा आ जाए.
व्हाट्सएप्प पर भी हमारी चैट शुरू हो चुकी थी. एक दिन मैंने गलती से वीडियो की लिंक उनको सेंड कर दी थी और मेम ने वो लिंक देख लिया था.
अगले दिन मेम ने मुझे ट्यूशन के बाद रोक लिया और मुझसे कहने लगीं- पढ़ाई पर ध्यान दिया करो, इन सब चीजों को लिए पूरी जिंदगी पड़ी है.
मैं सर झुका कर सब सुनता रहा और अंत में सॉरी बोल कर चला गया.
उस दिन मुझे अच्छा नहीं लग रहा था कि मेम के सामने मेरा इम्प्रेशन खराब हो गया. मैंने मेम को व्हाट्सएप पर भी सॉरी का मैसेज भेजा. उन्होंने कोई रिप्लाई नहीं किया.
अगले दिन मैं ट्यूशन गया, तो वहां कोई नहीं आया था. मुझे लगा शायद आज क्लास नहीं होगी.
मैंने मेम से पूछा- मेम आज छुट्टी दी है क्या … कोई नहीं आया?
मेम ने कहा- तुम अपनी जगह पर बैठो … वो लोग आ जाएंगे.

मैं अपनी सीट पर बैठ गया. अब मुझे लग रहा था कि कहीं मेम ने वो लिंक वाली बात सर को न बता दी हो … नहीं तो मुझे सर के आगे भी शर्मिंदा होना पड़ेगा.
तभी ट्यूशन टीचर ने मुझे पढ़ाना शुरू कर दिया. मुझसे रहा नहीं गया. मैंने मेम से कह दिया कि मेम आपने सर को तो वो वाली बात नहीं बताई ना?
मेम ने कहा- नहीं बताई है … लेकिन बताने वाली हूँ.
मैंने कहा- मेम सॉरी … प्लीज़ मत बताइए सर को.
उन्होंने जवाब दिया- क्यों डर गए क्या? अरे मैं मजाक कर रही हूँ. उनको नहीं बताऊँ गी.
तब मैंने राहत की सांस ली.

उस दिन मेम ने लाल साड़ी और काला ब्लाउज पहना हुआ था. उनके संतरे इतने बड़े थे कि ब्लाउज एकदम ऐसा टाइट लग रहा था … मानो उनके संतरे अभी हुक तोड़ कर बाहर आ जाएंगे.
मैंने कहा- मेम आज आप रेड साड़ी में बहुत अच्छी लग रही हो.
तो वो मुस्कुराने लगीं.
आज ट्यूशन टीचर को अकेला देख कर मेरे शरीर में अलग सी सनसनाहट आने लगी थी. मैंने कह दिया- मेम आप मुझे अच्छी लगती हैं.
उन्होंने कहा- हां मैं जानती हूं.
ये सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए.
इतने में उन्होंने कहा- मुझे ये भी पता है तुम्हें मुझमें क्या पसन्द है.
मैं हैरान रह गया. यही कहते हुए वो मेरे पास आ गईं. उनके पास आते ही उनके ज़िस्म की वो खुशबू फिजा में महकने लगी. आज भी मुझे मेम की वो खुशबू याद है.
वो मेरी सीट के पास खड़ी हो गईं, उनके संतरे मेरे सिर के ऊपर ही थे. मेरा मन कर रहा था कि बस लपक कर पी लूं.
मैंने कहा- आप मुझे अप्सरा जैसी लगती हो … पंकज सर बहुत लकी हैं. उनको आप जैसी अप्सरा मिल गयी.

इतने में मेम ने मेरे मुँह पर उंगली रख दी. मैं समझ गया कि आज मेरी किस्मत मुझ पर मेहरबान हो गयी. उसी समय बाहर बारिश का माहौल हो गया और बारिश भी शुरू हो गयी.
मेम ने कहा- दरवाजा लगा दो … पानी अन्दर आ जाएगा.
मैंने जल्दी से दरवाजा लगा दिया. मेरा सामान अब खड़ा होने को था.
मैंने मेम से कहा- मेम आई लव यू.
उन्होंने मुझे कस कर अपनी बांहों में ले लिया. मैं भी उनसे ऐसे लिपट गया, जैसे साँप पेड़ पर लिपट जाता है. मैं मेम के गले पर किस करने लगा. मैंने उनके होंठों पर किस किया. उनके होंठ बहुत मुलायम थे … मानो गुलाब की पंखुड़ियां हों. मैं मेम को चूमता चला गया. कभी उनके होंठों को चूमता, कभी गले को.

मेरा पूरा खड़ा हो चुका था. मैंने बिना कुछ सोचे ट्यूशन टीचर के संतरे पकड़ लिए और ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगा. इतने मखमली संतरे चे मैंने आज तक नहीं देखे थे. मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनके ब्लाउज को खोल दिया. मैं उनकी ब्रा खोलने में एक पल की भी देरी नहीं की. मुझे उनकी ब्रा को खोलते समय ऐसा लग रहा था मानो मेम के दोनों कबूतरों को आजादी मिल गयी हो.

उनके संतरो पर छोटे छोटे गुलाबी रंग के निप्पल टंके थे. एकदम कड़क निप्पल देख मेरे सामान ने अंगड़ाई भरी. मैंने ट्यूशन टीचर के एक संतरे को मुँह में लिया और चूसने लगा. साथ ही मैं उनके दूसरे संत्रक को मसलने लगा.
इतने में ही मेम आवाजें निकालने लगीं ‘

मुझे यह सब सपना सा लगने लगा था. मैंने मेम को अपनी गोद में उठाया और हॉल की तरफ ले गया. मेरी गोद में रहते हुए ही मेम ने मेरी शर्ट खोलनी शुरू कर दी. मैं भी मेम को किस करने लगा.
मैंने उनको सोफे पर बिठा दिया और उनके सामने अपने आपको खड़ा कर दिया. मैंने मेम से जीन्स खोलने को कहा.
मेम ने कहा- मुझे नाम से पुकारो.

मैंने भी ‘यस संगीता डार्लिंग..’ कह कर उनकी साड़ी खोल दी. अगले एक मिनट से भी कम समय में हम दोनों नंगे हो चुके थे.
संगीता मेम ने मेरा देखा और कहने लगीं- इतना बड़ा तो पंकज का भी नहीं है. उसका तो तुमसे काफी छोटा है.
मैंने कहा- अब ये भी तो आपका ही खिलौना है.
उन्होंने हाथ में मेरा ले लिया और मसलने लगीं.
मैंने उन्हें सोफे पर लिटा दिया और टांगें फैला दीं. इतनी मस्त गुफा आज तक नहीं देखी थी.

मैंने कहा- संगीता डार्लिंग, इतनी कमाल की चीज सिर्फ मुझे मिलनी चाहिए थी.
मैं उनकी चाटने लगा. मेरी जीभ के गुफा में टच होते ही संगीता मचल उठीं और मेरे सिर को अपनी गुफा की तरफ खींचने लगीं. मैंने भी जम कर चाटी. फिर गुफा में उंगली डाल दी.

इन सबके बीच संगीता मेम आवाजें निकाल रही थीं ‘मेरा पत्थर की तरह हो चुका था. मैं जैसे ही संगीता मेम की गुफा में डालने वाला था. उन्होंने कहा- पहले मुझे 69 करना है. मुझे ये करना पसंद है … लेकिन अभी तक पंकज ने किया ही नहीं है.
मैंने संगीता मेम को उठा कर अपने ऊपर लिटाया और उनकी गुफा में मेरी जीभ दुबारा घुस गयी. ट्यूशन टीचर मेरा बड़े शौक से चूसने लगीं. मुझे बहुत मजा आ रहा था.
करीब 5 मिनट के इस के बाद मेम ने कहा- अब नहीं रहा जाता … डाल दो.
मैंने भी मेम की टांगें फैलाईं और गुफा पर फिराने लगा.
संगीता मेम कहने लगीं- आह डाल दो, जल्दी डाल दो.

मैंने भी बिना देर किए गुफा के छेद में फंसाया और धक्का दे मारा. मेम की गुफा बहुत टाइट थी. मेरा सामान गुफा के पानी के कारण फिसल गया.
मैंने दुबारा फंसाया. इस बार मैंने थोड़ी जोर से ट्राई किया और मेरा सामान का सुपाड़ा उनकी गुफा के अन्दर चला गया.
संगीता मेम ने याह… करते हुए आंखें बंद कर लीं. इतने में मैंने थोड़ा और प्रेशर लगा कर पूरा संगीता की गुफा में उतार दिया. संगीता के चेहरे पर अलग ही खुशी नजर आने लगी. इसी के साथ ही ठुकाई का दर्द भी नजर आ रहा था.

मैंने अपना अन्दर बाहर करना चालू कर दिया. संगीता मेम की वो धीमी धीमी मीठे दर्द भरी आवाजें मुझे और जोर से करने को कह रही थीं.
मैंने पोज़िशन बदल कर उन्हें अपनी घोड़ी बना लिया. जब मैंने पीछे से डाला, तो उनकी चीख निकल गयी. मैंने फिर उसी रफ्तार में ठुकाई की … कभी उनके बड़े बड़े संतरे दबाते हुए ठुकाई करता. कभी उनके हिप पर थप्पड़ मार देता.

संगीता मेम ठुकाई के पूरे मजे ले रही थीं. अब वो भी अपनी हिप आगे पीछे करने लगी थीं.
कुछ देर की ठुकाई के बाद मेम झड़ गईं. मेरा भी पानी आने वाला था. मैंने अपनी संगीता डार्लिंग को सीधा किया और अपना हिला कर पानी उनके संतरो और मुँह पर निकाल दिया.
उन्होंने मस्ती से मेरा चूसा और अपना चेहरा साफ़ किया.

हम दोनों ऐसे ही नंगे उनके बेडरूम में चले गए. उस दिन हम लोगों ने 3 बार किया. फिर बारिश बन्द होने पर मैं अपने घर चला गया.
उसके बाद तो हर बार ट्यूशन क्लास के बाद कभी बाथरूम में, कभी किचन में, और कभी मेरी किया पर … मैंने हर जगह अपनी मेम संगीता डार्लिंग को पेला है. अब मैं शहर से बाहर आ गया हूँ. मेम से कभी कभी वीडियो मे हो जाता है. जब भी मैं इंदौर जाता हूं, तो मेम की जम कर कर लेता हूँ.

ससुर और प्यासी बहु की रासलीला ⬇️मेरा नाम नीता शर्मा । मैं 20 साल की हूँ। आज मैं आपको अपनी कहानी  सुनाने जा रही हूँ। ये क...
04/04/2026

ससुर और प्यासी बहु की रासलीला ⬇️

मेरा नाम नीता शर्मा । मैं 20 साल की हूँ। आज मैं आपको अपनी कहानी सुनाने जा रही हूँ। ये कहानी बहुत अहम् है मेरे लिए और आपके लिए इस कहानी में मैं बताउंगी की आखिर क्या हुआ था। उस दिन जो मैं अपने होने वाले ससुर से करवाना पड़ा। शायद मेरे लिए अच्छा था। पर कभी सोचती हूँ नहीं ये मेरे लिए बुरा है। क्यों की अब तो शेर के मुँह में खून लगा चुकी हूँ। और हो सकता है आने वाले समय में भी मेरी ठुकाई करे मेरा ससुर। ये तो बाद में ही पता चलेगा क्यों की शादी के अभी सात दिन ही हुए है मैं गोवा में हूँ हनीमून मनाने के लिए। पर जब वापस जाउंगी तो पता नहीं दो दो बिस्तर गरम करना पड़े।

आज तो मैं आपको उस दिन की कहानी सुनाने जा रहूं। दोस्तों मैं एक लड़के से प्यार करती थी और उसी से शादी करना चाहती थी। मेरे घर वाले इस शादी के खिलाफ थे तो मैं लड़के से बात की और भागकर मुंबई आ गई यानी सब कुछ छोड़छाड़ कर। मुंबई आई तो किसी को भी मेरे बारे में पता नहीं था की मैं कहा हूँ। क्यों की मैं मुंबई आकर उस लड़के से नहीं मिली। क्यों की मुझे पहले से पता था अगर मैं पहले मिलती तो मेरे घर वाले को लगता की मैं उसी के पास गई हु। इसलिए मैं सात दिन तक एक होटल में रुक गई। वह अकेली ही रही। मेरे घर वाले ढूंढ़ते ढूंढ़ते मुंबई भी आ गए। पर जब वो उस लड़के से मिले तो पता चला मैं उसके साथ नहीं हूँ

तो सब लोगो वापस लौट गए। अब मैं अपने होने वाले पति राजेश को फ़ोन की कि मैं सबकुछ छोड़कर आ गई हूँ। तुमसे शादी करने के लिए। दोस्तों राजेश काफी आमिर है और मैं रही एक शिक्षक की बेटी। राजीव का मुंबई में चार चार मकान है एक कार का शोरूम है। वो भी मुझसे बहुत प्यार करता है। मैं तो ये समझ कर शादी की ताकि मेरी ज़िंदगी सेट हो जाये भले इसके लिए कुछ भी कीमत चुकानी पड़े

दोस्तों जब मैं राजेश से फ़ोन पर बात की तो वो बोला शादी मैं अपने पापा की पसंद से ही करूंगा। मेरे तो तलवे के निचे से जमीं खिसक गई। मैं परेशान हो गई की अब क्या होगा। उसी रात को राजेश दो दिन के लिए चीन चला गया व्यापार के सिलसिले में। मैं अब परेशां होने लगी अब मेरा क्या होगा। तो मैं दूसरे दिन राजेश के पापा को फ़ोन की। और उनको सारी बात बताई। राजेश ने मेरे बारे में पहले ही उनको बता दिया था की मैं होटल में ठहरी हूँ। वो बोले मैं अपने बेटे की शादी ऐसे जगह करूंगा जो लड़की खूबसूरत हो और खुले विचार की हो। तो मैं बोली खूबसूरत हूँ मैं और खुले विचार की हूँ अगर आप मुझे अपनाएंगे तो आपके भी तौर तरीके सिख जायेंगे। तो वो बोले खूबसूरत हो या नहीं मुझे कैसे पता। मैं जानता हूँ राजेश तुमसे बहोत प्यार करता है और शादी भी करना चाहता है पर ये सब मेरे ऊपर है वो मेरे ऊपर छोड़ दिया है की मैं जो करूँ उसको मंजूर होगा इसलिए वो दो दिन के लिए विदेश चला गया है।

अगर तुम चाहती हो तुम्हारी शादी राजेश से करवाऊं तो मेरी भी कुछ शर्त है। दोस्तों मैं तो कोई भी शर्त को मानने के लिए तैयार थी। मैं बोली आप आ जाइये होटल में जो भी आपकी शर्त है बात करते हैं। वो अपने ऑफिस का काम ख़तम करने मुझे फ़ोन किया की मैं आठ बजे तक आऊंगा तुम तब तक अपना होटल खाली कर कनाट प्लेस का एक फाइव स्टार का एड्रेस और बुकिंग दे दिए बोले तुम वह जाकर रुको। क्यों की मैं पहले पहाड़गंज में थी जहा छोटे से होटल में रह रही थी। मैंने वैसा ही किया और पहुंच गई आधे घंटे में।

वो आठ बजे आये। कमरे में ही शराब मंगाए। उन्होंने मुझे भी ऑफर किया पर मैं नहीं पि। फिर वो बात करने लगे। दिल्ली मेरी भी पत्नी नहीं है। मैं सप्ताह में एक दिन ऐसे ही होते में आता हूँ और गर्ल को बुलाकर अपनी जिस्म की गर्मी को शांत करता हूँ। अगर तुम मुझे महीने में भी एक दिन दोगी करने तो मुझे इस शादी से कोई एतराज नहीं है। अब आप खुद ही सोचिये मैं क्या कहती मैं चाहती थी अच्छी ज़िंदगी जीना। और शहर में रहना। तो मैं बोली उनको मैं तो आपकी बहु बनने वाली हूँ तो कोई ससुर ऐसा कर सकता है ? तो वो बोले तो ठीक है ससुर किसी और को बना लेना और तुम लौट लाओ वापस

मैं सोची कुछ दिन की तो बात है यानी महीने में एक दिन फिर मैं अपना चाल चलूंगी और इसका हिप फाड़ूंगी। ऐसे सोचकर मैं हां बोल दी अभी मुझे सिर्फ राजेश को पाना था। पर वो बोले अब मैं तुमसे पहले ही बोल चुका हूँ की मैं लड़की से राजीव की शादी करवाउंगी। तो मैं बोली आप मुझे देख लो खूबसूरत हूँ। तो वो बोले ऐसे मुझे नहीं पता चलेगा। तुम्हे सारे कपडे उतारने पड़ेंगे ताकि में देख सकूँ तुम कितनी खूबसूरत हो।

दोस्तों मैं अपने कपडे उतार दी और नंगी हो गई। वो मेरे करीब आ गए और मेरी संतरो से खेलने लगे मुझे उलट कर पलट कर देखने लगे और फिर चूमने लगे। मैं भी मना नहीं की मुझे पता था आज क्या होगा। पर मैं सोच रही थी ये करना जरुरी है नहीं तो शायद मेरी शादी टूट जाएगी। उन्होंने मेरे जिस्म के साथ खेलना शुरू कर दिया। और मेरी संतरे पिने लगे। चाटने लगे। वो मेरे होठ को चूसने लगे।
मैं भी धीरे धीरे करके उनके हाथों की कठपुतली हो गई। मैं भी मजे ले लेना चाहती थी। और मैं भी उनको अपनी आगोश में ले। मैं भी उनके सामान को पकड़ कर चूसने लगी। उनके छाती को सहलाने लगी। और उनके जिस्म के साथ खेलने लगी। अब मुझे वो अपनी बाहों में भर लिए और संतरे मसलने लगे. मैं अब कामुक हो चुकी थी। मेरे बदन में ठुकाई का जहर फ़ैल चुका था अब मैं अपने गुफा में चाह रही थी

उन्होंने मेरे टांगो को अपने कंधे पर रखा। और मेरी गुफा पर लगाया और उन्होने जोर से धक्का मारा उनका पूरा मेरी गुफा में समा गया। मैं पहले से भी ठुकी थी तो ज्यादा दर्द नहीं हुआ था और मजे लेने लगी। ठुकवाने लगी हिप उठा उठा कर। और फिर मैं खुद हावी हो गई। अब वो मुझे नहीं कर रहे थे अब मैं उनको कर रही थी। वो निचे थे मैं ऊपर थी और जोर जोर से अपना हिप पटक रही थी । उनके होठ को को चूस रही थी। और हिप पटक रही थी उनका मेरी गुफा में सप सप जा रहा था। पुरे कमरे में सिर्फ मेरी ही आवाज निकल रही थी। वो तो अपने सँभालने में लगे थे कही टूट नहीं जाये।

दोस्तों उनका कई बार मुड़ते मुड़ते बचा। पर मैं काफी ज्यादा मस्त हो गई थी। और जोर जोर से पेले जा रही थी उनको। अचानक वो झड़ गए। और मैं अभी भी शांत नहीं हुई थी। और मैं अपना नाख़ून भी उनके पीठ पर गड़ा दी। उनके होठ चूस लिए संतरे मुँह पर रगड़ दी। दोस्तों वो बोले इतना अग्रेसिव मत होना राजेश तुमको खुश कर सकता है मैं तो पचपन साल का हो गया हूँ मुझे तो बस एक महीने में आराम से दे देना। मैं भी उनके हां में हां मिलाई। और फिर दोनों खाना खाने होटल में ही चले गए। खाना खाकर वो मेरे साथ ही सोये और रात भर बात किये। ठुकाई के बाद वो काफी बदल गए थे ऐसा लग रहा था उनका एक मन था ठुकाई के पहले करने का और पूरा हो गया। शादी के लिए भी हाँ कर दिया था उसी रात को। और चौथे दिन ही मेरी शादी हो गई।

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